कहां से आता है अवसाद? चेहरे पे हंसी देता है कौन?


कहां से आता है अवसाद? चेहरे पे हंसी देता है कौन? मेरे लिये यह कविता का विषय नहीं, जद्दोजहद का विषय रहा है. पिछले महीने भर से मैने अपने एक बहुत करीबी को अवसाद में घिरते देखा है. अवसाद चिकित्सा के साथ साथ सपोर्ट मांगता है. अपने हिन्दुस्तान में चिकित्सा की बजाय ओझाई का सहारा लिया जाता है. व्यक्ति अनिद्रा, अवसाद और व्यग्रता से ग्रस्त हो जाये और उसका तात्कलिक कारण न समझ आये तो उसे भूत-प्रेत और पागलपन की परिधि में मान लिया जाता है.

बचपन में मैने इसी प्रकार की समस्या से ग्रस्त व्यक्ति के परिवारजनों को हनुमान मंदिर के पुजारी की ओझाई की शरण में जाते देखा था.

अवसाद में उतरे व्यक्ति के चेहरे के हाव-भाव भयोत्पादक हो सकते हैं. मेरे एक मित्र जो कभी अवसाद में थे बता रहे थे कि पडो़स की एक छोटी बच्ची ने उनसे, उनके अवसाद के दौर में, बेबाकी से कहा था – अंकल, आपका चेहरा देख कर डर लगता है. नैराश्य और आत्महत्या के विचार चेहरे पर अजीब प्रभाव डालते हैं.

अवसाद में न्यूरोकेमिकल बैलेंस के लिये दवा के साथ साथ प्राणायाम तथा आसन अत्यंत लाभप्रद होते हैं. ये सभी आसान क्रियायें है. इसके साथ कतरा-कतरा ही सही, उत्साह की छोटी मात्रा भी बरबाद नहीं होनी चाहिये. परिवार के लोग अवसादग्रस्त के तनाव को कम करने और उत्साह बढा़नें के लिये महत्वपूर्ण सहायता कर सकते हैं.

पर अंतत: अवसाद में डूबे को स्वयम ही अवसाद से बाहर आना होता है. यह काफी कठिन है, पर असंभव नहीं. मैं सफल हो चुका हूं.

मैने जिस करीबी के अवसाद से यह चिठ्ठा शुरू किया था; आज डेढ़ माह बाद उसके चेहरे पर हंसी आई है. वह सफल हो रहा है अवसाद के खिलाफ.

बडा़ अच्छा लग रहा है!


Author: Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://halchal.blog/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt Facebook Page: gyan1955

One thought on “कहां से आता है अवसाद? चेहरे पे हंसी देता है कौन?”

  1. पाण्डेय जी, अवसाद से हम सभी कभी न कभी गुजरते ही रहते हैं. जिसकी संवेदनाये जितनी प्रबल होगीं, अवसाद से वो ही ज्यादा गुजरता है. ओझाई तो एक तरह की प्लेस्बो ही है. संवेदनाहीन अवसाद से नहीं गुजरते, गुंसाई जी कह गये हैं-“सबसे अच्छा मूढ़ जिसे न व्यापे जगत गति”आपके प्रियजन अवसाद से बाहर निकल कर हंसे, बधाई.

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