Tata Steel’s Ethics Jyoti

टाटा स्टील का एथिक्स कोऑर्डिनेटर विषयक विज्ञापन – ज्योति पाण्डेय के चित्र के साथ

2 thoughts on “Tata Steel’s Ethics Jyoti”

  1. थोड़ी देर से आया आपकी इस पोस्ट पर. वास्तव में ब्लोगिंग में टिप्पणी और प्रति टिप्पणी की ऐसी परंपरा है कि ब्लोगर उन्ही में उलझा रहता है. खैर …. इस देश में कोई भी स्टेटमेंट देना स्वीपिंग स्टेटमेंट सा हो जाता है… क्योंकि कई मामलों में .. कई परिस्थितियों में वे बात बिल्कुल सटीक नहीं बैठती… टाटा स्टील का यह विज्ञापन यह कोशिश तो जरुर है कि राडिया टेप काण्ड के बाद साख को जो क्षति पहुची है वे ठीक किया जाय… लेकिन इतना तो जरुर है कि अन्य कारपोरेट घरानों की तुलना में टाटा की छवि साफ़ है.. उनके काम करने का तरीका बेहतर है और वे पूरी तरह कमीशन/दलाली पर व्यापर नहीं करते…. अधिक तो नहीं पता…लेकिन कुछ जानकार टाटा प्रोजेक्ट्स में हैं और वे कहते हैं कि बड़े इन्फ्रास्त्रक्चर प्रोजेक्ट के लिए वे रिश्वत आदि नहीं देते…. यह उनके एथिक्स में है.. कुछ और कमपनियों को जानता हूं जो व्यापर में रहते हुए भी साफ़ सुथरे तरीके से काम करते हैं… उदहारण के तौर पर दिल्ली में एक कंपनी है गौरसंस .. उनके मालिक बी एक गौड़ .. रेलवे में इंजीनियर थे… आज रियल एस्टेट में कोई दस हज़ार करोर के प्रोजेक्ट्स हैं उनके पास… बेहद इमानदार … बेहद एक्सेसेबल हैं… एक और कंपनी है आदित्य डेवलपर्स… उनकी मालकिन उमा अग्रवाल हैं… चार हज़ार करोर के प्रोजेक्ट्स हैं उनके पास भी.. पति की अकाल मृत्यु के बाद अकेले दम पर रियल एस्टेट में हैं और पूरी तरह इमानदारी पर उनकी कंपनी चलती है…
    .. नए कारपोरेट कुछ ऐसे हैं जो इन्टरनल मोटिवेशन के लिए कुछ ऐसे विभाग बनाते हैं … यह सब उनके सी एस आर के अंतर्गत आते हैं… हो सकता हो कि टाटा ने यह विज्ञापन देने से पहले इस विभाग का गठन किया हो… वास्तव में कई बार यह विज्ञापन कंपनी की रणनीति भी होती है… और उसके हिसाब से कंपनी अपने भीतर परिवर्तन करती है..

    .. आप स्वस्थ्य लाभ लीजिये…

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    1. धन्यवाद अरुण चन्द्र जी, इस महत्वपूर्ण टिप्पणी के लिये। मुझे यह संतोष है कि मेरे पाठक बहुत सारगर्भित टिप्पणी करते हैं और सामान्यत: मेरे पर्सोना में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। लिहाजा, प्रतिटिप्पणी में एक प्रकार का आनन्द है!

      टाटा का उद्योग चलाना मुझे अच्छा लगता है, पर यह एथिक्स कोऑर्डिनेटर एक पी.आर. एक्सरसाइज सी लग रही है। इसके अलावा, अगर वह विजिलेंस/सतर्कता का दूसरा नाम है तो बेकार सी चीज होगी। एथिक्स जीवन पद्यति है, और उसको विभागीय फंक्शन भर में समेटा नहीं जा सकता!

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