आज तो कोहरा घना है – प्रतिनिधि चित्र

आज तो मन है बिस्तर में ही चाय नाश्ता मिल जाए। उठना न पड़े। बटोही (साईकिल) को देखने का भी मन नहीं हो रहा।

आज तो कोहरा घना है। यह प्रकृति की व्यक्तिगत आलोचना है!

घना कोहरा

पता नहीं बिसुनाथ का क्या हाल होगा। वह तो आपने एक कमरे के घर में बाहर पुआल के बिस्तर पर सोता है। आज उसे नींद आयी भी होगी? बेचारा। सत्तर साल के आसपास का है। जिंदगी भर मेहनत किया। अब उसे घर के बाहर के टप्पर तले पुआल के तखत पर रहना ही नसीब है। ऐसा नहीं कि उसके साथ ज्यादती हो रही है प्रारब्ध की। गांवदेहात में अनेक लोगों और ज्यादातर वृद्धों का यही हाल है। … फिर भी, तीन चार दशक पहले के वृद्धों से बेहतर दशा है उसकी।

अशोक भी आज नहीं आएगा जल्दी। अलाव वही जलाता है। बिजली भी ऐसे मौसम में गुल है। ऐसे में रजाई में ही रहना उचित है; पर कोहरा देखने का मन ही है जो बार बार घर के बाहर ले जाता है।

सर्दी का ऐसा दिन इस साल पहला ही है।

और इस पर मुंशी जी ने टिप्पणी की –

सूरज न हुआ सचिवालय कर्मचारी हो गया
"12 बजे तक लेट नहीं 3 के बाद भेंट नहीं" 😄

Originally tweeted by मुंशी जी™ (@munshi_jee) on 23-12-2020.


खैर, जैसा घना कोहरा था, सूरज ने वैसे ही दूर भी किया। शायद उन्होने अपनी कैजुअल लीव केंसिल कर ड्यूटी बजाना उचित समझा।


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://gyandutt.com/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt Facebook Page: gyanfb

आपकी टिप्पणी के लिये खांचा:

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: