दोस्ती अनोखी – चिल मारिये यार

मुझमें परिवर्तन है! छियासठ की उम्र में सीरियल और ओटीटी की ओर देखने का मन हो रहा है। छोटी फिल्में – पच्चीस तीस मिनट की – भी आकर्षित कर रही हैं। भगवान जो न करायें। भगवत भजन का समय आ रहा है, परलोक के लिये ग्रेडिंग सुधारने की उम्र है और वीडियो-फिल्म-सीरियल की सूझ रही है! बुढ़ापे में बहेल्ला हो रहे हैं ज्ञानदत्त! राम राम!

अमेजन प्राइम डाउनलोड कर लिया है लैपटॉप पर। अब नेटफ्लिक्स के बारे में उहापोह चल रहा है। थोड़ी झिझक है – भगत मण्डली कहती है कि ये प्लेटफार्म हिंदू धर्म का मजाक उड़ाता है। उसका बिजनेस मॉडल डगमगा रहा है। फिलहाल तो अमेजन प्राइम और यू‌ट्यूब का सब्स्क्रिप्शन है। उसी को देखने में काफी समय लगता है।

सत्तर साल के जगन्नाथ मिश्र हैं। बनारस के। घाटों के आसपास ही उनका घर है। बच्चे बड़े हो कर देस-परदेस चले गये हैं। पति पत्नी अकेले रहते हैं। जगन्नाथ चिड़चिड़े होते जा रहे हैं।

कल सोनी के चैनल पर एक सीरियल शुरू हुआ है – जगन्नाथ और पूर्वी की दोस्ती अनोखी। रात साढ़े नौ बजे। बहत्तर साल के जगन्नाथ मिश्र हैं। बनारस के। घाटों के आसपास ही उनका घर है। बच्चे बड़े हो कर देस-परदेस चले गये हैं। पति पत्नी अकेले रहते हैं। जगन्नाथ चिड़चिड़े होते जा रहे हैं। सवेरे सवा छ बजे का अलार्म बजता है उनकी मेज घड़ी में। प्राणायाम करते कहते हैं – सवा छ बज गये और हमें चाय नहीं मिली।

जगन्नाथ मिश्र में कुछ मैं हूं – ज्ञानदत्त पांड़े।

जगन्नाथ मिश्र में कुछ मैं हूं – ज्ञानदत्त पांड़े। प्राणायाम करते जगन्नाथ कहते हैं – सवा छ बज गये और हमें चाय नहीं मिली।

जगन्नाथ मिश्र घाट पर घर से भागी एक लड़की पूर्वी को वे गंगा में कूद कर आत्महत्या करने से बचाते हैं। लड़की अपनी अरेंज्ड मैरिज की बजाय अपने प्रेमी से शादी करने के लिये भागी है, पर उसका प्रेमी “प्रेक्टिकल या दब्बू” है। उल्लू का पट्ठा प्रेम करने लायक हईये नहीं है! जब वह इधर उधर की बहलाऊ बात फोन पर करता है तो वह नदी में कूद जाती है।

वह नये जमाने की ‘बिंदास’ लड़की है। करती पहले है, सोचती बाद में है। हम जब जवान थे – पिलानी में पढ़ते हुये तो हमें कोई अईसन लड़की दिखी ही नहीं। शायद यह मिलेनियल्स में भी न हो। यह जेन-जेड (Gen Z) मॉडल की बाला है! 😆

जगन्नाथ उसे बचा कर घर ले आते हैं। भीगी लड़की को उनकी पत्नी तौलिये से सुखाती हैं और एक ग्लास गर्म दूध उसके हाथ में दे रखा है। तब प्रारम्भ होती है अनोखी दोस्ती जगन्नाथ और पूर्वी की। वह जगन्नाथ जी की चिड़चिड़ी आदत पर कहती है – चिल मारिये; इतना टेन्शन क्यूं है यार!

जगन्नाथ का “चिल मारिये यार” सुन कर मुंह खुला का खुला रह जाता है।

जगन्नाथ का “चिल मारिये यार” सुन कर मुंह खुला का खुला रह जाता है।

वे ताव खा जाते हैं – “अरे मेरी पोती की उम्र की हो तुम, और मुझे ‘यार’ कह रही हो?!”

पहला एपीसोड इतना ही है। जगन्नाथ के ताव खाने पर वह लड़की, पूर्वी मोटी मोटी आंखें निकाल कर उनकी ओर देखती है। जेनरेशन गैप में टेन्शन होता है पर दो जेनरेशन गैप में शायद अनोखी दोस्ती होती है।

जगन्नाथ के ताव खाने पर वह लड़की, पूर्वी मोटी मोटी आंखें निकाल कर उनकी ओर देखती है। जेनरेशन गैप में टेन्शन होता है पर दो जेनरेशन गैप में शायद अनोखी दोस्ती होती है।

… कुछ वैसे ही जैसे मेरी पोती चिन्ना पांड़े मुझसे कहती है – बाबा, एक राज की बात बतायें। अब मै मोगली बन गयी हूं! वैसे चिन्ना पांड़े तो Gen Z नहीं; पोस्ट जेन जेड मॉडल की होगी जब बड़ी होगी; जेनरेशन अल्फा Gen α।

चिल मारिये जीडी! साढ़े नौ बजे रात बिस्तर में घुस रजाई ओढ़ने की बजाय सीरियल देखने की आदत पालिये। छियासठ की उम्र में जीवन का बिंदासत्व जो न कराये वह थोड़ा! 😆

[सभी चित्र “दोस्ती अनोखी” के यू-ट्यूब से लिये स्क्रीनशॉट हैं]


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring village life. Past - managed train operations of IRlys in various senior posts. Spent idle time at River Ganges. Now reverse migrated to a village Vikrampur (Katka), Bhadohi, UP. Blog: https://gyandutt.com/ Facebook, Instagram and Twitter IDs: gyandutt Facebook Page: gyanfb

8 thoughts on “दोस्ती अनोखी – चिल मारिये यार

  1. लॉक डाउन की पिछले साल की बैठकी ने हमें भी टीवी सीरिअल में फंसा दिया है। स्टार प्लस पर इमली और अनुपमा देखने के लिए अपनी दिनचर्या उसी के हिसाब से बनाने लगा हूँ। आजकल ओटीटी ने भी काफी खींचा है। अब इस अनोखी दोस्ती को भी देखने का मन हो गया है। देखें क्या होता है। आपकी सोच में पारदर्शिता और भाषा का बेबाकपन मुझे हमेशा ही प्रेरित करते हैं।

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  2. क्या कहने, आप तो मेरी आदत पकड़ते जा रहे हैं। जबकि मैं सठियाने से अभी काफी दूर हूं। Lockdown में मैंने अनेकों सीरियल देखे बिस्तर में घुस कर। आदत अबतक लगी हुई है।
    अनोखे रिश्ते की कहानी हमेशा एक सच, एक किस्म का बिंदासपन, विचारों के उतार चढ़ाव को साथ लेकर चलती है।

    अब आपने मुझे एक सीरियल बताया है तो बदले में मैं भी बता देता हूं। मेरे डैड की दुल्हन, सीरियल है सोनी का ही, देख लीजिए। बड़ा मस्त है चिल मारने लायक।

    पर चिन्ना पांडे आपके परिवेश में बढ़ी हो रही है, इसलिए चिल मारिए के नजरंदाज वाले एटीट्यूड के साथ नहीं, चिल मारिये करेंगे कुछ, या chi mariye निपट लेंगे वाले एटीट्यूड के साथ बड़ी होगी।

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    1. चिन्ना पाण्डे अभी ही मेरी शिक्षिका बन जाती है! रोज ग्लोब में एक नई जगह देखती है और मुझे कहती है – बाबा, जब मैं केलीफोर्निया जाऊंगी तो आपको भी साथ ले चलूंगी! 🙂

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    1. हा हा! आपकी बिटिया नहीं कहती – चिल मारिये पापा! काहे इतनी टेंशन लेते हैंं! 😀

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