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stabled rake of kashi vishwanath express

इस गांव में भारत की अर्थव्यवस्था में ब्रेक लगे दिखते हैं


कुल मिला कर एक सवारी गाड़ी का रेक और चार बसें यहां मेरे घर के बगल में स्टेबल हैं। … यानी अर्थव्यवस्था को ब्रेक लग चुके हैं और उसे देखने के लिये मुझे अपने आसपास से ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ रहा।

वह टीका नहीं लगवाना चाहते


उनके जैसे बहुत से लोग जैसा चल रहा है चलने देना चाहते हैं। भले ही लस्टम पस्टम चले, पर लॉकडाउन न होने से नून-रोटी तो चल रही है। उनके जैसे बहुत से लोगों को कोरोना टीके को ले कर भ्रांतियां और पूर्वाग्रह हैं।

कबाड़ कलेक्शन केंद्र


गांव उतना जीवंत नहीं रहा, जितना कल्पना में था। पर फिर भी बेहतर है। बहरहाल कबाड़ बीनक बच्चे, कबाड़ी साइकिल वाले और कबाड़ कलेक्शन केंद्र भविष्य में बढ़ेंगे। अर्थव्यवस्था दहाई के अंक में आगे बढ़ेगी तो कबाड़ तो होगा ही!

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ज्ञान दत्त पाण्डेय

मेरे बारे में

नमस्कार, मैं ज्ञान दत्त पाण्डेय, एक भारतीय रेल सेवा से रिटायर्ड रेल अफसर हूं। मैं रेलवे के विभागध्यक्ष पद से रिटायर हुआ। अब मैं पूर्वी उत्तर प्रदेश (भारत) के एक गांव में रह कर अपनी साइकिल से आसपास के ग्रामीण जीवन को देखता हूं।

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