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Camel Keepers

घुमंतू ऊंट वाले


इतना जरूर समझ आया कि पेट पालने को बहुतेरे उद्यम हैं। और उसके लिये सरकार को निहोरते निठल्लों की तरह बैठा रहना कोई सम्मानजनक समाधान नहीं है। आपके पास ऊंट हो तो ऊंट से, गदहे से, वाहन या सग्गड़ (ठेला) से सामान ढो कर अर्जन किया जा सकता है।

पॉडकास्ट गढ़ते तीन तालिये


उन लोगों के कहे में वह ही नहीं होता जो आप सोचते हैं। पर उससे कहीं बेहतर होता है, जो आप सोचते हैं। यही मजा है तीन ताल पॉडकास्ट का। मैं अनुशंसा करूंगा कि आप इस सीरीज के सभी पॉडकास्टों का श्रवण करें, करते रहें। इसका नया अंक आपको शनिवार देर रात तक उपलब्ध होता है।

आत्मनिर्भरता का सिकुड़ता दायरा


अब हताशा ऐसी है कि लगता है आत्मनिर्भरता भारत के स्तर पर नहीं, राज्य या समाज के स्तर पर भी नहीं; विशुद्ध व्यक्तिगत स्तर पर होनी चाहिये। “सम्मानजनक रूप से जीना (या मरना)” के लिये अब व्यक्तिगत स्तर पर ही प्रयास करने चाहियें।

ट्विटर स्पेसेज पर आजतक रेडियो वालों का बेबाक बुधवार


आप आजतक रेडियो को ट्विटर पर फॉलो करें और बुधवार रात नौ बजे पालथी मार कर तीन घण्टा ट्विटर पर अपनी टाइमलाइन खोल कर आजतक रेडियो के चिन्ह को क्लिक कर सुनना प्रारम्भ करें। मजा भागवत पुराण सुनने जैसा आयेगा। पक्का।

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ज्ञान दत्त पाण्डेय

मेरे बारे में

नमस्कार, मैं ज्ञान दत्त पाण्डेय, एक भारतीय रेल सेवा से रिटायर्ड रेल अफसर हूं। मैं रेलवे के विभागध्यक्ष पद से रिटायर हुआ। अब मैं पूर्वी उत्तर प्रदेश (भारत) के एक गांव में रह कर अपनी साइकिल से आसपास के ग्रामीण जीवन को देखता हूं।

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