मैं अंग्रेजी से नकल का जोखिम ले रहा हूं


रीडर्स डाइजेस्ट के अगस्त-2007 अंक में “गिविंग बैक” स्तम्भ में “फ्रूट्स ऑफ प्लेण्टी” नामक शीर्षक से पद्मावती सुब्रह्मण्यन का एक लेख है (पेज 39-40). मुम्बई में 66 वर्षीया सरलाबेन गांधी हर रोज 6 दर्जन केले खरीदती हैं. इतने केले क्यों? कितने नाती-पोते हैं उनके? सरलाबेन केले ले कर 300 मीटर दूर घाटकोपर के राजवाड़ी म्युनिसिपलContinue reading “मैं अंग्रेजी से नकल का जोखिम ले रहा हूं”

मेरी चिंतायें


1. लोग पच्चीस-तीस की उम्र में जड़ हो जाते हैं. पर दाह संस्कार के लिये 80-90 की उम्र तक इंतजार करते हैं. बीच का समय टेलीवीजन की शरण में काटते हैं. यह कैसे रोका जा सकता है? लोगों की जीवंत उम्र कैसे बढ़ाई जा सकती है? 2. ऐसा क्यों है कि दुख-दर्द हमें असीमित लगतेContinue reading “मेरी चिंतायें”

मण्डन मिश्र के तोते और ज्ञान का पराभव


आदि शंकराचार्य को कर्ममीमांसक मण्डन मिश्र से शास्त्रार्थ करना था जिससे कि काशी के पण्डित उन्हें मान्यता दे दें. वे महिष्मति में मण्डन मिश्र का घर ढ़ूंढ़ रहे थे. राह में एक स्त्री कपड़े धो रही थी. उससे शंकराचार्य ने मण्डन मिश्र के घर का पता पूछा तो उस स्त्री ने एक श्लोक में उत्तरContinue reading “मण्डन मिश्र के तोते और ज्ञान का पराभव”

कछुआ और खरगोश की कथा – नये प्रसंग


कछुआ और खरगोश की दौड़ की कथा (शायद ईसप की लिखी) हर व्यक्ति के बचपन की कथाओं का महत्वपूर्ण अंग है. यह कथा नये सन्दर्भ में नीचे संलग्न पावरप्वाइण्ट शो की फाइल में उपलब्ध है. इसमें थोड़े–थोड़े फेर बदल के साथ कछुआ और खरगोश 4 बार दौड़ लगाते हैं और चारों बार के सबक अलग–अलगContinue reading “कछुआ और खरगोश की कथा – नये प्रसंग”

बेंजामिन फ्रेंकलिन और शब्दों की मितव्ययता


सम्भव है आप में से कई लोगों ने बेंजामिन फ्रेंकलिन का जॉन थॉम्प्सन द हैटर वाला किस्सा सुना हो. जहां पर कम शब्दों मे कहने की बात आती है, वहां इसका उल्लेख बड़ा सशक्त हो जाता है. अमेरिकी डिक्लेरेशन ऑफ इण्डिपेंडेंस के ड्राफ्ट पर बहस चल रही थी. थॉमस जैफर्सन के ड्राफ्ट पर लोग बदलावोंContinue reading “बेंजामिन फ्रेंकलिन और शब्दों की मितव्ययता”

प. विष्णुकांत शास्त्री से क्या सीख सकते हैं चिठेरे?


पण्डित विष्णुकांत शास्त्री (1929-2005) को मैं बतौर आर.एस.एस. के सक्रिय सम्बद्ध व्यक्ति, पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष, भाजपा के उपाध्यक्ष अथवा उत्तरप्रदेश/उत्तराखण्ड के राज्यपाल के रूप में नहीं वरन एक लेखक के रूप में याद कर रहा हूं. और उस रूप में अच्छे ब्लॉगर के लिये एक सबक है – जो मैं बताना चाहता हूं.Continue reading “प. विष्णुकांत शास्त्री से क्या सीख सकते हैं चिठेरे?”