लौटे प्रवसियों की प्राथमिकता कोरोना से बचाव नहीं, रोजगार है #गांवकाचिठ्ठा


यह जो बड़ी संख्या में आबादी आ कर गांव में टिकी है, वह यह नहीं पता कर रही कि यहां अस्पताल कितने हैं; कितने बिस्तर उनमें कोविड19 के लिये हैं; … वे यह जानना चाहते हैं कि रोजगार कब, कहां और कैसे मिलेगा।

यह सतर्क रह कर सामान्य जीवन जीने का समय है #गांवकाचिठ्ठा


कोरोना को लेकर बहुत सी भ्रांतियां डाक्टरों ने, मीडिया ने और राजनेताओं/सेलीब्रिटीज ने फैलाई हैं। वे भ्रांतियां जितनी शहरों में हैं, उतनी गांवों में भी हैं।

गांव लौटे लोग बिना रोजगार ज्यादा बैठ नहीं पायेंगे #गांवकाचिठ्ठा


अगर उन्हें घर पर रहते हुये एक सम्मानजनक व्यवसाय मिल जाता है, जो प्रवास से भले ही कुछ कम आमदनी दे, तो वे सब यहीं रुक जायेंगे और यह समाज और उत्तर प्रदेश की बड़ी जीत होगी।

पूर्वांचल में कोरोना प्रसार का प्रारम्भ है यह। #गांवकाचिठ्ठा


न केवल इन जिलों के मामले नित्य बढ़ रहे हैं; वरन अगले दिन बढ़ने की दर पिछले दिन बढ़ने की दर से ज्यादा है। अर्थात, मामले बढ़ने की दर भी बढ़ रही है। यह अलार्म है – स्पष्ट और तेज आवाज का अलार्म।

#गांवकाचिठ्ठा – मिट्टी, बालू की ट्रॉलियाँ, गर्दा और कोविड काल


ट्रॉलियां चल रही हैं, गर्दा उठ रहा है, प्रदूषण हो रहा है – यानी अर्थव्यवस्था पटरी पर आने लगी है।

#गांवकाचिठ्ठा – कल दिन की शुरुआत अच्छी थी, शाम तक खुशी गायब हो गयी


तुलसीपुर प्राइमरी स्कूल के क्वारेण्टाइन सेण्टर में बम्बई से आया एक परिवार रखा गया था। वह अवधि पूरा किये बिना घर चला गया और उसमें से एक बालक डायरिया से मर गया।” 😦