चारधाम यात्रा सम्पन्न – बद्रीनाथ को जल अर्पण किया प्रेमसागर ने


अभी दोपहर सवा दो बजे प्रेमसागर ने सूचना दी कि उन्होने बद्रीनाथ के दर्शन कर लिये हैं। वे वीडियो कॉल कर मंदिर के बाहर निकलते दिखाना चाहते थे, पर खराब नेटवर्क के कारण वह नहीं कर पा रहे। अब वे कुछ जलपान कर बद्रीनाथ से रवाना होंगे।

प्रेमसागर – गंगोत्री से गोमुख और वापस


“बन वाले हमको अकेले जाने की परमीशन नहीं दिये। बोले – बाबा लोग का भरोसा नहीं। क्या पता कौन बाबा किस गुफा में आसन जमा ले। एक बार बैठ जाने पर उस बाबा को वहां से निकालना मुश्किल होता है।” – प्रेमसागर ने बताया।

भीमाशंकर – सातवाँ ज्योतिर्लिंग दर्शन सम्पन्न


प्रेमसागर अब एस्केप वेलॉसिटी पा चुके हैं। शायद। अब उनके पास इतने अधिक सम्पर्क हैं, इतना नेटवर्क है कि फोन पर बतियाने में ही समय जाता होगा, प्रकृति और आसपास के निरीक्षण में नहीं। मेरे हिसाब से वे एक विलक्षण यात्रा को रेत की तरह झरने दे रहे हैं!

प्रेमसागर और त्र्यम्बकेश्वर


हम तीनों को – जिन्होने प्रेमसागर के शुरुआती यात्रा में सहायता की थी; को प्रेमसागर की प्रवृत्ति में आया परिवर्तन आश्चर्य में डालता है।
प्रवीण जी मुझे कहते हैं कि इस पूरे प्रकरण पर दार्शनिक तरीके से सोचा और लिखा जा सकता है!

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन सम्पन्न – प्रेमसागर पर अंतिम पोस्ट


जो भी हो; पिछले लगभग चार महीने प्रेमसागर के साथ यात्रा जुगलबंदी ने मुझे बहुत फायदा दिया है। उनकी यात्रा न होती तो मैं रीवा, शहडोल, अमरकण्टक और नर्मदीय क्षेत्र, भोपाल, उज्जैन, माहेश्वर, गुजरात और सौराष्ट्र की मानसिक यात्रा कभी न कर पाता।

पोरबंदर के आसपास कांवर यात्रा पर विचार


यह मैंने समझ लिया है कि क्या करना चाहिये और क्या नहीं; उसपर मुझे बहुत माथापच्ची नहीं करनी है। उनकी यात्रा मॉनीटर करने का फेज नहीं रहा। वे सौराष्ट्र के आतिथ्यस्वर्ग के आनंदलोक में हैं।