हुबली का सौन्दर्य


मैने कहा कि मैं बिना किसी ध्येय के घूमना चाहता हूं। गंगा के कछार में। यह एक ओपन स्टेटमेण्ट था – पांच-छ रेल अधिकारियों के बीच। लोगों ने अपनी प्रवृति अनुसार कहा, पर बाद में इस अफसर ने मुझे अपना अभिमत बताया – "जब आपको दौड़ लगा कर जगहें छू कर और पैसे फैंक सूटकेसContinue reading “हुबली का सौन्दर्य”