हेमेन्द्र सक्सेना जी के संस्मरण – पुराने इलाहाबाद की यादें (भाग 1)


सन 1944 में इलाहाबाद “पूर्व के ऑक्सफोर्ड” के नाम से जाना जाता था। दो किलोमीटर के दायरे में विश्वविद्यालय सीनेट हॉल, म्योर सेण्ट्रल कॉलेज, आनन्द भवन और पब्लिक लाइब्रेरी स्थित थे। कहा जाता था कि अगर एक ढेला यहां फेंका जाये तो किसी न किसी महान हस्ती पर गिरेगा।

रामप्रसाद तीर्थयात्री का निमन्त्रण


चार-पांच लोग आपस में राम मन्दिर की बात कर रहे थे। एक महिला ने मुझे सम्बोधित कर कहा – आप तो मन्दिर बणवाओ सा। हम सब आयेंगे कार सेवा करने।

उमाशंकर, डबल रोटी वाले


भाजपा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बार बार दर्शाया उमाशंकर ने। लेकिन साथ में यह भी कहा कि पार्टी कार्यकर्ता को अहमियत नहीं देती।

बसन्त कनौजिया


बसन्त न हों तो भाजपा और कांग्रेस के इन नेताओं की नेतागिरी के जलवे की चमक निकल जाये।

भूसा और खबर


सवेरे साइकिल-सैर में जाते हुये पाया था कि उस खेत में थ्रेशिंग के बाद गेंहूं वहां से हटाया जा चुका था। भूसा भी एक ट्रेक्टर-ट्रॉली में ट्रॉली की ऊंचाई तक लादा जा चुका था। बाकी बचा अधिकांश भूसा झाल (पुरानी धोती-साड़ी के बोरों) में इकठ्ठा कर दिया गया था। चहल पहल थी वहां। लग रहाContinue reading “भूसा और खबर”

हनक-ए-योगी


द्वारिकापुर गंगा किनारे गांव है। जब मैने  रिटायरमेण्ट के बाद यहां भदोही जिले के विक्रमपुर गांव में बसने का इरादा किया था, तो उसका एक आकर्षण गंगा किनारे का द्वारिकापुर भी था। यह मेरे प्रस्तावित घर से तीन किलोमीटर दूर था और इस गांव के करार पर बसा होने के बावजूद गंगा तट पर आसानी सेContinue reading “हनक-ए-योगी”