हेमेन्द्र सक्सेना जी के संस्मरण – पुराने इलाहाबाद की यादें (भाग 4)

भारत के उज्वल भविष्य की हमारी आशायें किसी अनिश्चय या भय से कुन्द नहीं हुई थीं। हम यकीन करते थे कि आम आदमी की जिन्दगी आने वाले समय में बेहतर होने वाली है।


यह हेमेंद्र सक्सेना जी की इलाहाबाद के संस्मरण विषयक अतिथि ब्लॉग पोस्टों का चौथा और अंतिम भाग हैैै।

भाग 3 से आगे –

कॉफी हाउस नियमित जाने वाले लोग वेटरों को उनके नाम से जानते और सम्बोधित करते थे। वेटर बड़ी स्मार्ट वर्दी – झक साफ सफ़ेद पतलून, लम्बे कोट और माड़ी लगी पगड़ी – में रहते थे। हेड वेटर के कमर में लाल और सुनहरी पट्टी हुआ करती थी जबकि अन्य वेटर हरी पट्टी वाले होते थे।

वे अधिकतर केरळ और तमिलनाडु के होते थे और इसके कारण इलाहाबाद का कॉस्मोपॉलिटन चरित्र और पुख्ता होता था। अधिकांश व्यवसायी पारसी या गुजराती थे -जैसे पटेल, गुज्डर (Guzder) या गांधी।

दो चाइनीज स्टोर और एक बंगाली मिठाई की दुकान भी हुआ करती थी। देश विभाजन के बाद कुछ पंजाबी भी आये। मुझे अच्छी तरह याद है मिस्टर खन्ना की लॉ की पुस्तकों की दुकान। खन्ना जी अपने छात्र दिनों के गवर्नमेण्ट कॉलेज लाहौर की यादों की बातें किया करते थे।

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“राटन” खरबूजा


कस्बाई लोगों को अंगरेजी नहीं आती। उत्तरप्रदेश के कस्बाई लोगों का अंगरेजी में हाथ तंग है; यह जगत विदित है। यही नजारा आज मुझे दिखा।

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खरबूजा। यह ’राटन’ वाला नहीं है। यह मैने खरीदा था।

नवरात्र का समय। हम महराजगंज बाजार (भदोही जिला) में फलाहार तलाश रहे थे। एक ठेले पर खरबूजा दिखा। दो ढेरियों में – चालीस रुपये किलो और बीस रुपये किलो। देखने में दोनो में खास अन्तर नहीं। बीस वाले कुछ दबे लग रहे थे।

ठेले वाले ने बताया कि तीस रुपये के भाव से लाया था मण्डी से। छांट कर चालीस और बीस वाली ढेरियां बना दीं। हमने चालीस वाले में से दो खरबूजे लिये।

उसी समय एक महिला लेने आई। ठेले वाले ने दाम बताया। महिला बीस वाली ढेरी के एक खरबूजे को हाथ लगा कर ठिठकी। ठेले वाले ने उसे कहा – “लई ल। खराब नाहीं बा। राटन हौ। (ले लो, खराब नहीं है, राटन है)।”

महिला की झिझक देख उसने फिर अंगरेजी छांटी – “खराब नाहीं, थोड़ा दबा बा। राटन हौ।” 

महिला ने ले लिया एक खरबूजा। न उसे मालुम और न ठेले वाले को कि राटन (रॉटन – rotten – सड़ा हुआ) क्या होता है। अंगरेजी शब्द का वजनदार प्रयोग उसका खरबूजा बेचने में सहायक हुआ।

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आप भी यूपोरियन मार्केट में जाइयेगा तो राटन खरबूजा तलाशियेगा! 😆