अगियाबीर की पुरातात्विक खुदाई का कार्य अन्तिम चरण में


मार्च के उत्तरार्ध में आये थे बीएचयू के प्राचीन भारतीय इतिहास और पुरातत्व विभाग के लोग अगियाबीर टीले के दक्षिणी-पूर्वी भाग में उत्खनन करने। करीब तीन सप्ताह बाद प्रोफेसर अशोक सिंह जी ने मुझे इस बारे में बताया। मैने पुरातत्व टीले पर चढ़ने में अपने घुटनों की तकलीफ की बात की तो डा. अशोक सिंह … Continue reading “अगियाबीर की पुरातात्विक खुदाई का कार्य अन्तिम चरण में”

भदोही की आर्कियॉलॉजी के तत्वशोधक रविशंकर


प्रोफेसर (डा.) अशोक सिंह ने अगियाबीर टीले के खुदाई स्थल मुझे रविशंकर से परिचय कराते बताया कि अगर आपको भदोही के पुरातत्व पर जानकारी चाहिये तो इन (रविशंकर) से बेहतर सोर्स कोई नहीं। तभी मुझे लग गया कि मुझे रविशंकर जी को कस कर पकड़ना है अपने आस-पास की जानकारी में गहराई और सांद्रता लाने … Continue reading “भदोही की आर्कियॉलॉजी के तत्वशोधक रविशंकर”

दण्डीस्वामी डा. विद्यानन्द सरस्वती – गुन्नीलाल पाण्डेय के गुरु जी – से मुलाकात


कल अगियाबीर का गंगातट देखने के बाद हम (राजन भाई और मैं) गुन्नीलाल पाण्डेय जी के घर पंहुचे। गुन्नी रिटायर्ड स्कूल अध्यापक हैं। सम्भवत: प्राइमरी स्कूल से। मेरी ही उम्र के होंगे। एक आध साल बड़े। गांव के हिसाब से उनकी रुचियाँ परिष्कृत हैं। बड़ा साफ सुथरा घर। तरतीब से लगाई गयी वनस्पति। चुन कर … Continue reading “दण्डीस्वामी डा. विद्यानन्द सरस्वती – गुन्नीलाल पाण्डेय के गुरु जी – से मुलाकात”

अगियाबीर के रघुनाथ पांड़े जी


रघुनाथ पांड़े जी नब्बे से ऊपर के हैं। पर सभी इन्द्रियां, सभी फ़ेकल्टीज़ चाक चौबन्द। थोड़ा ऊंचा सुनते हैं पर फ़िर भी उनसे सम्प्रेषण में तकलीफ़ नहीं है। ऐसा प्रतीत नहीं होता कि उन्हे अतीत या वर्तमान की मेमोरी में कोई लटपटाहट हो। जैसा उनका स्वास्थ है उन्हे सरलता से सौ पार करना चाहिये।सरल जीवन। … Continue reading “अगियाबीर के रघुनाथ पांड़े जी”

कमहरिया और बालकृष्णदास व्यास जी


उस शाम हम (राजन भाई और मैं) फिर कमहरिया के लिये साइकल पर निकले। शाम का समय था। यह सोचा कि आधा घण्टा जाने, आधा घण्टा आने में लगेगा। वहां आधे घण्टे रहेंगे व्यास जी के आश्रम में। शाम छ बजे से पहले लौट आयेंगे। जो रास्ता हमने चुना वह लगभग 80% पगडण्डी वाला था। … Continue reading “कमहरिया और बालकृष्णदास व्यास जी”