शेयर मार्केट धड़ाम

शेयर बाजार धड़ाम होता है, चढने के लिये. असली चीज आशावाद है.



उधर चिदंबरम जी बजट भाषण की तैयारी कर रहे थे, इधर शेयर मार्केट दुबला हुआ जा रहा था. मुन्ना का कहना सही है – भैया, बहुत से दिन सांड़ों के होते हैं; कभी कभी तो भालुओं की भी चांदी कटनी चाहिये. मुन्ना धुर आशावादी है. मैं शेयर मार्केट के बारे में बात कर आशावाद का टानिक उससे लेता हूं. मेरा शेयर मार्केट में ज्यादा स्टेक नहीं है, सो थोडा बहुत तात्कालिक घाटा आशावाद के टानिक के लिये अच्छा है. मुन्ना से बात कर मैं अपने स्टॉक की नैसर्गिक मजबूती के बारे में आश्वस्त हो कर ’मस्त’ हो जाता हूं. बजट की चीर फाड़ की जहमत नहीं उठाता. Continue reading “शेयर मार्केट धड़ाम”

‘अहो रूपम – अहो ध्वनि’, चमगादड और हिन्दी के चिट्ठे



इंटरनेट की जाली पर कई अलग अलग समूहों मे अनेक प्रजातियों के चमगादड़ लटक रहे हैं. ये चमगादड़ तेजी से फल फूल रहे हैं. इनमें से एक प्रजाति हिंन्दी के चिट्ठाकारों की है. उनकी कालोनी का दर्शन मै पिछले दो दिनों से कर रहा हूं.

ये चमगादड़ बुद्धिमान टाइप के हैं. आपस में ‘अहो रूपम – अहो ध्वनि’ के आलाप के साथ अपनी, जो भी कमजोरियां हों, उनपर से ध्यान हटा रहे हैं. परस्पर प्रशंसा के साथ एक दूसरे की साइट पर क्लिक करने का खेल भी खेल रहे हैं. अपनी साइट कैसे चमकाई जाये कि वह ज्यादा क्लिक हो सके, उसके लिये एक दूसरे का माल चुरा कर अपने चिट्ठे पर चस्पां करने का रोग भी कुछ में है. Continue reading “‘अहो रूपम – अहो ध्वनि’, चमगादड और हिन्दी के चिट्ठे”