#गांवकाचिठ्ठा – मिट्टी, बालू की ट्रॉलियाँ, गर्दा और कोविड काल

ट्रॉलियां चल रही हैं, गर्दा उठ रहा है, प्रदूषण हो रहा है – यानी अर्थव्यवस्था पटरी पर आने लगी है।


मई 18, विक्रमपुर, भदोही।

ट्रेक्टर ट्रॉलियाँ ज्यादा नजर आने लगी हैं। शायद लॉक डाउन में दी जा रही ढील के कारण है।

मेरे घर से नेशनल हाईवे तक करीब 800 मीटर की सड़क है और उसमें एक रेलवे फाटक भी है। इस सड़क पर करीब 8-10 ट्रेक्टर ट्रॉलियां आती जाती दिखती हैं। हाईवे की ओर वे गंगा बालू और खेतों से निकाली मिट्टी ले कर जाती हैं और वापसी में खाली ट्रॉली को दौड़ा कर लोड करने की होड़ रहती है। ट्रॉलियां ज्यादा दिखने से कच्ची सड़क पर धूल भी ज्यादा उड़ती है। पहले कई सप्ताह तक एक भी ट्रेक्टर ट्रॉली नहीं नजर आयी। अब उनकी लाइन लगी है। धूल और रेत से प्रदूषण होने लगा है।

मेरे घर से हाईवे/लेवल क्रॉसिंग को जाती सर्पिल पतली सड़क। कच्ची सड़क पर धूल का गुबार उड़ता दिख रहा है। जब ट्रेक्टर ट्रॉलियां ज्यादा होती हैं, तब यह धूल का अजगर सरीखी नजर आती है।

ट्रॉलियां चल रही हैं, गर्दा (धूल) उठ रहा है, प्रदूषण हो रहा है – यानी अर्थव्यवस्था पटरी पर आने लगी है।

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#गांवकाचिठ्ठा – कल दिन की शुरुआत अच्छी थी, शाम तक खुशी गायब हो गयी

तुलसीपुर प्राइमरी स्कूल के क्वारेण्टाइन सेण्टर में बम्बई से आया एक परिवार रखा गया था। वह अवधि पूरा किये बिना घर चला गया और उसमें से एक बालक डायरिया से मर गया।” 😦


कल सवेरे मैं साइकिल पर घूमने निकला। नेशनल हाईवे 19 की सर्विस लेन पर महराजगंज से बाबूसराय के बीच मुझे कोई प्रवासी आता नजर नहीं आया। अन्यथा, हर सौ मीटर गुजरने पर कोई न कोई पैदल चलता नजर आता था। पैदल न हो तो कोई न कोई ट्रक या साइकिल गुजरती थी प्रवासी व्यक्ति(व्यक्तियों) के साथ। मैं शिवाला से भी गुजरा। उस समय वहां कोई नहीं था, सिवाय मोहित के डॉबरमैन कुकुर बड्डी के। फोन मिलाया तो मोहित ने बताया वह आधा घण्टा बाद आने वाल था।

सवेरे साढ़े छ बजे शिवाला परिसर। पेनोरामा चित्र। दायें किनारे पर शिव मंदिर है और बायें एनएच19 हाईवे।

दस बजे सवेरे शिवाला पर श्रमिकों के लिये चलते भण्डारे पर उपस्थित मोहित से फोन पर बात हुई तो पता चला कि श्रमिक गुजर ही नहीं रहे थे हाईवे पर।

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