Babu the knife sharpener


He is regular visitor. Comes to our home after a few months. He is Babu, from Babusarai – a village 3-4 kms away. People in villages usually get their agricultural implements sharpened from his bicycle fitted sharpener.

In our case it’s usually the kitchen knives and few odd khurpis (खुरपी).

Babu from Babusarai
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गांव के इन नौजवानों ने मेरा नजरिया बदलना शुरू कर दिया है

इन नौजवानों के चरित्र/व्यक्तित्व में बहुत सशक्त परिवर्तन हो रहे हैं। …
वे मानवता के देवदूत बन कर उभर रहे हैं!


गांव के लोगों को मैंने “बड़बोले, अकर्मण्य और निठल्ले” कहा। वह शायद शिवाला परिसर में कोरोनापलायन के पथिकों को भोजन कराने वाले इन नौजवानों को अच्छा नहीं लगा। कौन अपने गांव, मुहल्ले को खराब कहना अच्छा मानेगा? पर जब गांव की अधिकांश आबादी हाथ पर हाथ धरे बैठी हो और हैरान परेशान पथिकों को असंवेदना या हिकारत से निहारती हो, तब यह कहना ठीक ही है।

इन नौजवानों को लीक से हट कर काम करते और परोपकार की भावना से लबालब देखना अधिकांश गांव वालों को सुहा नहीं रहा – ऐसा मुझे बताया गया।

“इन लोगों का कुछ स्वार्थ होगा”, “जरूर पैसा बचा लेते होंगे”, “जब कोरोना पकड़ेगा, तब चेतेंगे ये”, “मूर्ख हैं” जैसे कथन इनके बारे में कह रहे हैं आमतौर पर गांव वाले।

पर कोरोनापलायन पथिकों को भोजन कराने, उनकी अन्य प्रकार से सहायता करने और उनके प्रति दयालुता का भाव रखने/दर्शाने से इन नौजवानों के चरित्र/व्यक्तित्व में बहुत सशक्त परिवर्तन हो रहे हैं। हम जैसे लोगों से जो थोड़ा बहुत प्रशंसा और उत्साहवर्धन मिलता है, वह इनके लिये टॉनिक का काम कर रहा है।

वे मानवता के देवदूत बन कर उभर रहे हैं!

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द्वारिकापुर में गंगा किनारे पीपल का बिरवा बड़ा हो रहा है।


गंगा किनारे एक बड़े पीपल के पेड़ से adequate social distancing पर है यह। बड़ा होकर शायद कोरोना युग की याद करे। क्या पता लोग श्राद्ध के घण्ट भी बांधने लगें इसपर। या कोई साधू इसकी छाया में कुटिया बनाए!

जो होगा, देखने के लिए अभी तुम चलोगे जीडी! 😁


पेण्ट माई सिटी प्रॉजेक्ट, प्रयागराज


Paint

प्रयागराज गया था मैं पिछले मंगलवार। ढाई दिन रहा। शिवकुटी का कोटेश्वर महादेव का इलाका बहुत सुन्दर चित्रों वाली दीवालों से उकेरा हुआ था। पहले यह बदरंग पोस्टरों से लदा होता था। बड़ा सुन्दर था यह काम।

(अर्ध) कुम्भ मेला तीन महीने में होगा प्रयागराज में। कई शताब्दियों बाद शहर का नाम पुन: प्रयागराज हुआ है। शिवकुटी में जो भी लोग मिले, सबने कहा कि मैं मेले के समय प्रयाग में ही रहूं। ये चित्र देख कर जोश मुझे भी आ रहा था कि प्रयागराज में अगले कुम्भ मेले के दौरान रहना अच्छा अनुभव होगा। Continue reading “पेण्ट माई सिटी प्रॉजेक्ट, प्रयागराज”