7-9 जुलाई 2023
तीन दिन में प्रेमसागर चौमू से चल कर फुलेरा पंहुचे। इस प्रकरण में तीन जगहों पर रात्रि विश्राम किया –
- संत दादू राम का आश्रम, राधाकिशन पुरा
- सुप्रीम महाविद्यालय, हिंगोनिया
- सियारामदास बाबा की गौशाला, फुलेरा
कुल मिला कर सत्तर-पचहत्तर किलोमीटर चले। औसत 25 किमी प्रति दिन। पहले दो दिन तो बीस किमी प्रतिदिन की दूरी तय की। तीसरे दिन थोड़ा ज्यादा खींचा अपने को।
प्रेमसागर ने रास्ते के बारे में जो बताया उसे मैं बिंदुवार रख रहा हूं।
- बरसात का पानी इस्तेमाल करने के प्रयास –


बरसात का पानी जमा करने के लिये खोदे गड्ढ़े
“बारिश अच्छी हो रही है भईया। लोग पानी के बचाव के लिये जागरूक हैंं। जगह जगह साठ प्रतिशत सरकारी सहायता पर लोगों ने बीस फुट गहरा, सौ फुट लम्बा और अस्सी फुट चौड़ा गड्ढ़ा बनाया है। इसकी दीवारों और नीचे के तल पर प्लास्टिक बिछाया है जिससे पानी जमीन में न चला जाये। बरसात का पानी इन गड्ढ़ों में जमा हो रहा है। यह पानी खेती के काम आयेगा। बताया कि एक गड्ढ़े की लागत तीन लाख आती है। साठ परसेंट उसमें से तो सरकार दे देती है। कुछ लोगों ने सरकारी अनुदान का मुंह न देखते हुये अपने स्तर पर ऐसे प्राइवेट गड्ढ़े बनाये हैं। कहीं कहीं तो प्लास्टिक की तिरपाल लगाने की बजाय लोगों ने गड्ढ़े की दीवारें और फर्श सीमेण्ट के बनवा लिये हैं। लोगों ने अपने गड्ढ़े बीस फुट गहरे और साठ फुट लम्बे, चालीस फुट चौड़े भी बनवाये हैं।”
प्रेमसागर के भेजे चित्रोंं में ये गड्ढ़े पानी से लगभग भरे नजर आते हैं। राजस्थान में इस साल अच्छी बरसात हुई है। सात जुलाई तक का जो भारत का ग्राफिक है, उसके अनुसार राजस्थान में औसत से साठ प्रतिशत से ज्यादा बारिश हुई है।

- “खेतों की सिंचाई पाइप से भी होती है, ड्रिप सिस्टम से भी और स्प्रिंकलर से भी। गड्ढ़े से पानी निकालने के लिये पम्प का प्रयोग होता है। खेतों के आसपास बिजली न होने पर डीजल जेनरेटर से उन्हें चलाया जाता है।


- अण्डर ग्राउण्ड पानी निकालने के लिये भी प्रयास हैं पर बोरिंग काफी गहराई में चली गयी है। इस इलाके में तो 1000 फुट से नीचे ही पानी मिलता है। अलवर की ओर पानी का स्तर ऊंचा था। “पानी की कमी से समझ आ रहा है भईया कि जो कहावत थी – जहां न पंहुचे गाड़ी, वहां पंहुचे मारवाड़ी – वह क्यूं कही गयी।” जैसे जैसे आगे पश्चिम की ओर बढ़ेंगे प्रेमसागर, पानी की समस्या और भी दीखेगी। पर अच्छा यह है कि यहां मानसून की वर्षा अच्छी हुई है। पश्चिमी राजस्थान में तो और भी अच्छी हुयी है औसत से। पूर्वी राजस्थान में 85 प्रतिशत ज्यादा बारिश है और पश्चिमी में 190 प्रतिशत।

- दादू राम जी के आश्रम में –
“आश्रम में कमरे भी थे, पर मैंने तो तीन तरफ से घिरे बराण्डे में ही पसंद दिया। मेरा तखत वहां लगा दिया गया। भोजन में रोटी और हरा मिर्च की सब्जी मिली। यहां मिर्च बड़ी बड़ी होती है और तीखी नहीं होती। आश्रम में बाकी लोग थे, पर महंत जी – गणेश दास जी अलवर गये हुये थे। बालक नाथ जी से मिलने। बालक नाथ अलवर के सांसद हैं और भईया जोगी आदित्यनाथ जैसे हैं। बात तो यह चल रही है कि भाजपा की मेजोरिटी आने पर वही मुख्यमंत्री बनेंगे।”

“आश्रम वालों ने भोजन के बाद आधा किलो-तीन पाव दूध पिला दिया। बोले – पच जायेगा। इतना चलेंगे तो शरीर में भी तो कुछ जाना चाहिये। भईया आश्रम में गायें नहीं हैं पर गांव वाले रोज पंद्रह किलो गाय का दूध दे जाते हैं श्रद्धा के साथ।”

“दोपहर में एक सज्जन मनोज यादव जी मिले थे। वे बोले कि आगे पुष्कर तक वे मेरे रहने खाने की व्यवस्था कर देंगे। उनकी जानपहचान और रिश्तेदारी है आगे। उनकी बहन भोपाल में डीएम हैं। अब देखें भईया महादेव उनके जरीये सहायता करायेंगे या फिर कोई और इंतजाम करेंगे। हम तो उन्हीं के भरोसे चल रहे हैं। … ये जो परेशानी हो रही है वह शायद बीमारी में यात्रा छोड़ कर घर जाने के कारण है।”
- सुप्रीम फार्मेसी कॉलेज, हिंगोनियाँ, डूंगरी, जयपुर में –
“आज ज्यादा नहीं चला भईया। बारिश के बाद उमस भरी गर्मी थी। भरत यादव जी ने व्यवस्था कर दी थी यहां तो यहीं रुक गया हूं। यह सुप्रीम कॉलेज है। जगह का नाम मैं कॉलेज के बोर्ड का फोटो भेजूंगा, उसमें मिल जायेगा। प्रिंसिपल साहब मिले थे। उन्होने कहा कि उनका फोटो न खींचा जाये, सो नहीं लिया। यहां कॉलेज में ही दो कमरे हैं अतिथियों के लिये। उसी में मेरा बिस्तर लगा दिया गया है।”

“भईया आप मेरी बात मानिये। आपकी तबियत बिल्कुल सही हो जायेगी। आप बकरी का दूध लीजिये कुछ दिन। यह चक्कर आने वाली तकलीफ खतम हो जायेगी। ज्यादा नहीं सौ ग्राम लीजिये। पीने में अच्छा नहीं लगेगा, इसलिये पास में नमकीन रखिये। उसके साथ सेवन करिये।” – प्रेमसागर इसी तरह की दवायें मेरी समस्याओं के लिये बताते हैं। कुछ का मैं प्रयोग करता हूं, कुछ के बारे में उन्हें “अश्वत्थामा हत:, नरो वा कुंजरो वा” स्टाइल में उत्तर देता हूं। अर्थात बकरी का दूध पिया या नहीं पिया, दोनो दशा में मेरा उत्तर तकनीकी तौर पर सही हो। :-)
“भईया यहां राजस्थान में गायें कम हैं, बकरियां ज्यादा हैं और स्वस्थ भी। एक बकरी तीन साढ़े तीन किलो तक दूध देती है। बकरी का दूध सस्ता है – पचास रुपया किलो। भैंस का तो साठ रुपया है। इसलिये लोग बकरी दूध के लिये ही पालते हैं। कसाई को नहीं देते। उत्तर प्रदेश में तो बकरी बहुत कम दूध देती है। इसलिये दूध मंहगा है। दो सौ रुपया किलो तक बिकता है।”

- 9 जुलाई को हिंगोनिया से सवेरे जल्दी ही निकले प्रेमसागर। पर तीन किमी आगे उन्हें एक दम्पति ने रोक लिया चाय के लिये। “भईया वे लोग बाहर ही बैठे थे। मुझे कहा कि चाय पी कर जाईयेगा। तो वहां कुछ समय लगा। भईया यहां के लोग बहुत अच्छे हैं। ऐसे लोग हर तरफ नहीं मिले।”

दिन में कुछ दूर पहाड़ी रास्ता था, ऊंचाई वाला पर वह जल्दी ही पार हो गया। आगे समतल था। नौ तारीख को प्रेमसागर लगभग तीस – बत्तीस किमी चले। शाम के समय वे फुलेरा से तीन किमी पहले चल रहे थे कि तेज बारिश हो गयी। रुकना पड़ा। सड़क सीमेण्ट की थी और आधे घण्टे में ही रोड पर दो दो फुट पानी आ गया।
- रात विश्राम के लिये प्रेमसागर को फुलेरा के आउटस्कर्ट्स पर सियारामदास बाबा की गौशाला में जगह मिली। उनका तख्ता और गद्दा लगा दिया गया। “भोजन में रोटी-दाल-आलू की सब्जी था। मन माफिक ही था भोजन भईया। और भईया कल कुछ पैसा आया है अकाउण्ट में। मुझे मैसेज से यह तो पता चल रहा है कि लोगों ने पैसा दिया है, पर दूसरा वाला मोबाइल चोरी जाने से यह पता नहीं चलता कि किनने दिया है।… मौसम अजीब है भईया। दिन में धूप रहती है और शाम रात बारिश हो जा रही है।”

मौसम, कच्चा रास्ता, बारिश, ठिकाने की तलाश … उनकी बातें सुन कर लगता है कि यात्रा में उन्हें सामान्य से ज्यादा जद्दोजहद करनी पड़ रही है। पर उनके संकल्प में कमी नहीं है। मुझे अच्छी लग रही है उनके इस चरण की यात्रा। यह जरूर है कि जितनी जानकारी की अपेक्षा करता हूं, उतनी मुझे नहीं मिल रही। सियारामदास बाबा की गौशाला का ग्राफिक विवरण तो मिला ही नहीं। … पर शायद मुझे ज्यादा अपेक्षा पालनी नहीं चाहिये।
हर हर महादेव! ॐ मात्रे नम:!
| प्रेमसागर की शक्तिपीठ पदयात्रा प्रकाशित पोस्टों की सूची और लिंक के लिये पेज – शक्तिपीठ पदयात्रा देखें। ***** प्रेमसागर के लिये यात्रा सहयोग करने हेतु उनका यूपीआई एड्रेस – prem12shiv@sbi |
| दिन – 103 कुल किलोमीटर – 3121 मैहर। प्रयागराज। विंध्याचल। वाराणसी। देवघर। नंदिकेश्वरी शक्तिपीठ। दक्षिणेश्वर-कोलकाता। विभाषा (तामलुक)। सुल्तानगंज। नवगछिया। अमरदीप जी के घर। पूर्णिया। अलीगंज। भगबती। फुलबारी। जलपाईगुड़ी। कोकराझार। जोगीघोपा। गुवाहाटी। भगबती। दूसरा चरण – सहारनपुर से यमुना नगर। बापा। कुरुक्षेत्र। जालंधर। होशियारपुर। चिंतपूर्णी। ज्वाला जी। बज्रेश्वरी देवी, कांगड़ा। तीसरा चरण – वृन्दावन। डीग। बृजनगर। विराट नगर के आगे। श्री अम्बिका शक्तिपीठ। भामोद। यात्रा विराम। मामटोरीखुर्द। चोमू। फुलेरा। साम्भर किनारे। पुष्कर। प्रयाग। लोहगरा। छिवलहा। राम कोल। |
