The World Is Wrinkled — थॉमस फ्रीडमैन की पुस्तक पर सीक्वेल 


फ्रीडमैन ने दुनिया को वहाँ से देखा जहाँ नई सड़कें बन रही थीं। मैं उसे वहाँ से देख रहा हूँ जहाँ उन सड़कों पर चलते वाहनों ने पैदल चलने की ताकत घटा दी है। थॉमस फ्रीडमैन का ताजा लेख है न्यूयॉर्क टाइम्स में – Everybody Is a Loser in This Middle East War. वह लेखContinue reading “The World Is Wrinkled — थॉमस फ्रीडमैन की पुस्तक पर सीक्वेल “

मानसून ने चुपचाप हाजिरी लगा दी


पूरे जून भर बादल आते रहे, अनमने से। बरसने का उनका कोई इरादा नहीं था। भदोही जिले में तो जून के अंत तक लगभग 99 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज हुई। धान की नर्सरियाँ प्रतीक्षा में सूखने लगी थीं और किसान आसमान को कुछ अधिक देर तक देखने लगे थे। मौसम विभाग के अनुमान हरContinue reading “मानसून ने चुपचाप हाजिरी लगा दी”

एक रिटायर्ड अधिकारी का साइकिलवाद


रेलवे में नौकरी के दिनों की एक छोटी-सी आदत थी, जो तब सामान्य लगती थी। प्रयागराज या गोरखपुर के रेलवे जोनल मुख्यालय में एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक पैदल जाया जा सकता था, पर पैदल अकेले नहीं। साथ में चपरासी चलता था, फाइलें उठाए। बिल्डिंग के बाहर ड्राइवर कार लगाए खड़ा रहता था। वहContinue reading “एक रिटायर्ड अधिकारी का साइकिलवाद”

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