नियमित लिखना नहीं हो रहा, पर प्रेमसागर फोन कर या ह्वाट्सएप्प कर बता देतें है अपनी दंड यात्रा का हाल। घाघा से आगे निकल चुके हैं। सहस्त्रधारा पीछे छूट गई है। किसी अहमदपुर में वन विभाग के रेस्ट हाउस में शाम गुजार रहे थे। वन विभाग के डिप्टी साहब साथ में थे। नर्मदा माई कीContinue reading “प्रेमसागर की दंड नर्मदा परिक्रमा के छाले”
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एक अलग सोच से यात्रा की जरूरत
मोर्गन हाउसेल ने अपनी किताब The Art of Spending Money में एक प्रसंग लिखा है — फ्रेंच लेखक मार्सेल प्राउस्ट (1871-1922) ने एक युवक को; जो अपनी विपन्नता से दुखी रहा करता था; सलाह दी थी कि वह महलों और विलासिता की वस्तुओं से ईर्ष्या करने के बजाय चित्रकार जीन सिमोन चार्दें की कलाओं कोContinue reading “एक अलग सोच से यात्रा की जरूरत”
नर्मदापरिक्रमा के पदयात्री प्रेमसागर कल रात मेरे घर पर पहुंचे।
नर्मदापरिक्रमा के पदयात्री प्रेमसागर कल रात मेरे घर पर पहुंचे। वे डिंडोरी-शहडोल-प्रयाग से बस यात्रा करने आये। बोल रहे हैं अब देवोत्थानी एकादशी के समय ही मंडला के पहले चाबी से अपना लाठी उठायेंगे आगे की यात्रा को। लाठी वहीं मंदिर के पुजारी के यहां छोड़ आये हैं – संकल्प का प्रतीक। नवम्बर में मौसमContinue reading “नर्मदापरिक्रमा के पदयात्री प्रेमसागर कल रात मेरे घर पर पहुंचे।”
