लसमणा के दुबे बंधु


गांवदेहात डायरी  करीब साल भर बाद लसमणा और बनवारीपुर की संधि से गुजर रहा था। दांई ओर एक भव्य मंदिर बनता दिखा तो मेरी साइकिल अपने आप रुक गई। मंदिर के पास एक आदमी अपने तीन जर्मन शेफर्ड कुत्तों के साथ टहल रहे थे। बनियान और लुंगी में। तीनों कुत्ते बिना लीश के। मैंने सोचा,Continue reading “लसमणा के दुबे बंधु”

दिलीप चौरसिया से मुलाकात 


दिलीप से सवेरे बात होती है। वे महराजगंज में अपनी मेडिकल की दुकान पर हैं। उनका जो छोटा भाई मैडीकल दुकान चलाता है, बीमार हो गया है। अस्पताल में भर्ती है। उसका भी काम देखना होता है।  हाईवे पर ऊपरी मंजिल में उनकी साड़ी की दुकान है — वहां मिलना हुआ उनसे। मैडीकल दुकान सेContinue reading “दिलीप चौरसिया से मुलाकात “

महराजगंज कस्बे का बदलाव – दांत की डाक्टरी


कस्बे के बाजार के बदलाव की कथा अगर कही जाए, तो वह पिछले एक दशक में कहीं ज़्यादा स्पष्ट दिखती है। जब मैं रिटायर होकर यहाँ आया था, तब इक्का‑दुक्का ही प्रशिक्षित फ़िज़ीशियन थे; बाकी झोलाछाप। छोटी‑सी समस्या के लिए भी बनारस जाना पड़ता था, और ख़राब हाईवे व बढ़े ट्रैफ़िक के कारण दो घंटेContinue reading “महराजगंज कस्बे का बदलाव – दांत की डाक्टरी”

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