लोलई राम गुप्ता का भिण्डा


खांची में कई छेदों वाली पूपली के कई पैकेट थे। एक पैकेट बीस रुपये का। खुदरा में दो रुपये का एक बेचते होंगे दुकानदार। उसका नाम फेरीवाले ने बताया – “लोग चिप्स कहते हैं पर हम उसे भिण्डा कहते हैं। कटी भिण्डी जैसा दिखता है।”

प्लास्टिक फेरीवालोंं के समूह


कई समूह इस इलाके में प्लास्टिक की डेली-यूज की सस्ती वस्तुओं को बेचने के लगे हैं। वे मोबाइल, ऑनलाइन और मोटर साइकिल तथा हाईवे जैसी सुविधाओं का सही सही दोहन कर ग्रामीण जनता को सुविधा भी दे रहे हैं और अपना पेट भी पाल रहे हैं।

मॉपेड ने तिगुनी की इस्माइल की बिक्री


इस्माइल फेरीवाला ने मॉपेड खरीद ली है। बीस हजार का डाउन पेमेण्ट किया है, बाकी किश्त। करीब चौबीस सौ रुपया महीने की किश्त होगी। पहले साइकिल से चलता था तो आस पास के दस किलोमीटर का राउण्ड लगाता था। अब कछवाँ तक हो आता है। ज्यादा दूर तक जाने और नयी दुकानें कवर करने सेContinue reading “मॉपेड ने तिगुनी की इस्माइल की बिक्री”

कन्हैयालाल और फेरीवालों का डेरा


वे सब कानपुर के पास एक ही क्षेत्र से हैं। सामुहिक रूप से एक दूसरे के सुख दुख में साथ रहते हैं। शाम को भोजन सामुहिक बनता है। उसके बाद बोल-बतकही होती है। कुछ मनोरंजन होता है। फिर जिसको जहां जगह मिले, वहां वह सो जाता है।

कड़े प्रसाद बोले – कोरोना त कतऊँ नाहीं देखातबा साहेब


“कोरोना कहां है साहेब?! मुझे तो कहीं नहीं दिखा। कोई कोरोना से बीमार नजर नहीं आया। वह तो पहले था। छ महीना पहले। अब कहीं नहीं है।” – कड़े प्रसाद ने उत्तर दिया।

इतना खर्च कर रहे हैं उम्मीदवार #गांवपरधानी में!


यह सब पैसा, जो इकठ्ठा हो रहा है, तुरंत पोस्टर लगाने, गाड़ी-मोटरसाइकिल का पेट्रोल भराने, चाय समोसा, जलेबी खिलाने, गांजा – दारू – भांग का प्रबंध करने या सीधे सीधे वोट खरीदने में जा रहा है। पगलाये हुये हैं उम्मीदवार!