रामदेव बाबा पीर का मंदिर, सरवा, बोटाड


सरवा में रामदेव पीर बाबा के आज के मुकाम पर पंहुचने के पहले बुरा हुआ उनके साथ। रास्ता खराब था। सड़क पर गिट्टी उधड़ी हुई थी और बबूल के कांटे भी थे। एक जगह बबूल के कांटे चुभ गये पैर में।

वागड़ से राणपुर के आगे


रामगिरि बाबा के पास दो घोड़े हैं। रामदेव बाबा के सभी स्थानों, मंदिरों में घोड़े पाले जाते हैं। उसका कारण है कि रामदेव पीर बाबा घोड़े पर ही सवारी किया करते थे। बाबा रामदेव के सभी चित्र घोड़े के साथ ही हैं।

धंधुका से आगे प्रेमसागर, वागड़ में


रास्ते में प्रेमसागर खपरैल के मकान और एक जगह मंदिर-मस्जिद के आमने सामने के होने के चित्र भी भेजते हैं। उनसे लगता है कि गांवदेहात का गुजरात अन्य भारत से बहुत अलग नहीं है। एक जगह कपास की खेती का चित्र भी है।