गांवदेहात डायरी साइकिल लेकर निकलता हूं तो हर जगह कुछ बदलाव नजर आता है। विक्रमपुर की हाइवे से संधि पर दोनों ओर दो गुमटियां हैं—जग्गी की आलू टिक्की और राजेश की समोसा बेचने वाली। दस दिन से दोनों बंद हैं। दोनों गैस पर चलाते थे अपनी दुकान। अब मेरे लिये यह समाजशास्त्रीय अध्ययन होगा—देखना किContinue reading “खाड़ी जंग से बदलता गांवदेहात”
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खाड़ी जंग — पूना से पलायन
गांवदेहात डायरी अठारह साल का है राज जाटव। मेरे गांव से पूना गया था आठ महीने पहले। पहली बार गांव से बाहर निकला था—कमाने, अपने चाचा के साथ। पर पिछले महीने की अंतिम तारीख को खाड़ी की जंग शुरू हो गई। कम्पनी का नाम बताया—पूजा इंजीनियरिंग। चार चक्का कारों के बियरिंग बनाती है। राज केContinue reading “खाड़ी जंग — पूना से पलायन “
बरियापुर के महेश उपधिया
गांवदेहात डायरी महेश उपधिया के बब्बा के पास आसपास के गांवों में एक सौ तीस बीघा खेत थे। सवेरे लाठी लेकर निकलते तो सांझ हो जाती थी, सब खेत-बारी देख कर लौटने में। बीच रास्ते उपधिया की पाही पर उनका नौकर खिचड़ी, दही, बाटी-चोखा और दाल जैसा कुछ बना कर रखता था। बब्बा एक-दो घंटाContinue reading “बरियापुर के महेश उपधिया”
