वह टीका नहीं लगवाना चाहते


उनके जैसे बहुत से लोग जैसा चल रहा है चलने देना चाहते हैं। भले ही लस्टम पस्टम चले, पर लॉकडाउन न होने से नून-रोटी तो चल रही है। उनके जैसे बहुत से लोगों को कोरोना टीके को ले कर भ्रांतियां और पूर्वाग्रह हैं।

गारण्टीशुदा आय प्रयोग पर विचार


यहां गांव में प्रसन्नता के स्तर में वृद्धि (लॉकडाउन के बावजूद‌) मैंने देखी है। पर सरकारी फ्री राशन भी बेच कर दारू पीने के मामले भी सुनने में आये हैं। खातों में पैसे आने से मैंने महिलाओं को अधिक प्रसन्न होते पाया है।

गोविंद लॉकडाउन में बम्बई से लौट तीन बीघा मेंं टमाटर उगा रहे हैं


वे लॉकडाउन के समय बंबई से अपने घर वापस लौटे थे। वहां ऑटो चलाते थे। यहां समझ नहीं आया कि क्या किया जाये। फिर यह सब्जी उगाने की सोची।