गांवदेहात डायरी साइकिल से देखा गांव सुबह की हल्की धूप बरियापुर पर पड़ रही है।जीवन लाल, तीस-बत्तीस साल का दुबला-पतला नौजवान, खादी जैसी कमीज़ और गले में काला बैग टाँगे साइकिल पर बैठता है। बैग में फाइलें, एक रजिस्टर, कैलकुलेटर और अब तो एक स्मार्टफोन भी—जिससे वह कैशपोर के माइक्रोफिनांस ग्रुप की उपस्थिति और कलेक्शनContinue reading “हरामी कोई गाली है?”
