धूप खिली है और लॉन में जगह जमा ली है!


पत्नीजी ने कमरे में लैपटॉप, बिस्तर और रज़ाई के कंफर्ट जोन से भगा दिया है। बताया है कि आज अलाव की भी जरूरत नहीं। आज लॉन में कुर्सियां लगा दी हैं। धूप अच्छी है। आसमान साफ है। वहीं बैठो। कमरा बुहारने दो! और सच में आज लॉन शानदार लग रहा है। कार्पेट घास का आनंदContinue reading “धूप खिली है और लॉन में जगह जमा ली है!”

सर्दी पलट कर आई


दुनियाँ के विपरीत छोर पर एक से भारतीय परिवार के सर्दी के अलग अलग अनुभव। यहां हम बर्फ नहीं देखते तो आईस और स्नो का फर्क भी नहीं करते। घर के बाहर नीम से झरी पत्तियां साफ करनी होती हैं यहां और वहां स्नो।

ठण्ड बढ़ी है। आज कोहरे की दस्तक हुई है।


आज सवा छ बजे घर का गेट खोलने बाहर निकला तो पाया कोहरे की शुरुआत हो गयी है। अब दिनचर्या बदलेगी। सवेरे सात बजे साइकिल ले कर निकलने की बजाय अब नौ या दस बजे निकलना होगा। लेकिन साइकिल चलाते रहो ज्ञानदत्त जी। शारीरिक और मानसिक दोनो फिटनेस का मूल साइकिल में ही है। जिसContinue reading “ठण्ड बढ़ी है। आज कोहरे की दस्तक हुई है।”

रविवार, रामसेवक, अशोक के पौधे और गूंगी


माता-पिता ने उनका नाम रामसेवक रखा तो कुछ सोच कर ही रखा होगा। पौधों की देखभाल के जरीये ही (राम की) सेवा करते हैं वे! उनकी पत्नी को गुजरे दशकों हो गए हैं। बच्चे छोटे थे तो उनको पालने और उन्हें कर्मठता के संस्कार देने में सारा ध्यान लगाया।

अलाव


प्रज्वलित होती आग को निहारते समय अगर आदमी मौन हो कर सोचने की प्रक्रिया में उतरे तो जीवन, उसकी सार्थकता, मरण और मरण के आगे के कई प्रश्न तैरने लगते हैं। उन प्रश्नों और विचारों को सयास पकड़ना और भविष्य के लिये संंजोना एक अभूतपूर्व अनुभव है।

धूप सेवन और चोर गिलहरियों की संगत


सागौन के पेड़ के ऊपर एक गिलहरी दम्पति मोजे को ऊपर की ओर खींच रहे थे। वे हटाने पर आसपास चींचीं करते रहे, मानो उनकी सम्पत्ति हो और हम उसे जबरी हथियाने जा रहे हों। 😆