अस्वस्थता


स्पॉण्डिलाइटिसफोटो पुरानी है। दशा वर्तमान है। दशा आराम मांगती है ब्लॉगरी से। दफ्तर का काम तो पीछा छोड़ने से रहा। वहां गले में पट्टा बांध कर बैठते हैं। लोगों को बताना पड़ता है क्या बीमारी है और कबसे है। क्या व्यायाम करते हैं, आदि, आदि। लोग च्च-च्च करते हैं पर फिर काम की बात पर लौट आते हैं। जान छोड़ते नहीं।
खांसी बन्द हो, सर्वाइकल खिंचाव मिटे तो लिखने और टिप्पणी आदि करने का रुटीन बनाया जाये। अभी तो आराम का मन करता है – जो बहुत बदा नहीं है। ट्रेनों का अबाध आवागमन धकियाता है। चैन नहीं लेने देता। पग पग पर निर्णय मांगता है। लिहाजा ब्लॉगिंग का टाइम कट। बाकी, रेल का काम तो चलाना ही होगा! राशन-पानी उसी से मिलता है। 
वैसे दशा ऐसी खराब नहीं कि सहानुभूति की टिप्पणियों की जरूरत पड़े। लोग चुपचाप सटक लेते हैं। हम कम से कम अपनी कार्टूनीय फोटो दिखा कर सटक रहे हैं!
और ब्लॉगिंग का क्या, जब लगा कि कुछ ठेला जा सकता है, लौट लेंगे।ROFL 8
अच्छा जी, नमस्ते!


Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

13 thoughts on “अस्वस्थता

  1. हम आप के जल्दी स्वस्थ होने की कामना करते हैं ,वैसे कब से है ये बिमारी, क्या व्यायाम करते हैं , खाने में कोई परहेज, आदि आदि…।बाकी बाते बाद में पूछते हैं …।:)

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  2. अरे! जे का! कब, कैसे।च्च च तो नई करूंगा बस आप स्वस्थ और अच्छे भले रहें यही कामना करूंगा।

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  3. भाई ज्ञानदत्त जी,लोग तो दूसरों का मजाक बनाते है जिन्दगी में हसनें के लिए, पर आपने स्वयं को ही पात्र बनाया , ऐसा साहस तो बिरले ही कर सकते है.आज की नौकरी आदमी को क्या- क्या बीमारियाँ दे रही हैं, उसे की कड़ी में आपका यह व्यंग एक अच्छा उदहारण है.विशेष रूप से मैं हम सभी ब्लॉगर को ठेले वाला साबित करने के लिए प्रयुक्त निम्न पंक्तियाँ “और ब्लॉगिंग का क्या, जब लगा कि कुछ ठेला जा सकता है, लौट लेंगे।”दिल को छू गई. मैं भी टिप्पणी का ठेला लगा कर आ ही गया. टिप्पणी ग्रहण कर प्रकाशित करें.चन्द्र मोहन गुप्त

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  4. तरुण जी की टिप्पणी, ई-मेल से – हमने बड़ी मेहनत करके टिप्पणी टाईप करी फिर पता चला, लेने वाले ने ताला लगा के रखा है, इसलिये मेल से भेज रहे हैं, वैसे भी हम कभी कभी ही टिपियाते हैं – हम च्च-च्च नही कहेंगे बल्कि कहेंगे, वाह जनाब क्या हौसला है. वैसे ये सिर को संभालने वाला ऊपर कैमरे से बाँध के रखा है क्या या पंखे से।

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  5. मैं टिप्पणी बन्द मोड में रखना चाहता था। लगता है खुला रह गया। अब बन्द करता हूं। अन्यथा दिन में मॉडरेशन करने के चक्कर में ब्लॉगिंग और कम्प्यूटर से चिपकान चलता ही रहेगा!

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  6. अगर ट्रेन को ट्रेड (हमारे यहाँ स्टॉक एक्सचेन्ज पर ट्रेड आर्डर ट्रेन से भी ज्यादा स्पीड से आते हैं) से बदल दिया जाये और आपका चेहरा मेरे चेहरे से, तो यह मेरी पोस्ट कहलाई आज की और आप चोरी के आरोप में कॉपी राईट के केस में दिनेश भाई से सलाह लेते हुए नजर आयेंगे. :)हर्जाना बतौर बीमारी मे भी कमेन्ट कर आईये हमारी पोस्ट पर..जैसे हमने किया है…वरना कोर्ट में भी क्रेन पर लटक कर आना पडेगा ट्रेक्शन करवाते हुए…..फिर न कहियेगा कि बताया नहीं!! शुभकामनाऐं..शीघ्र स्वस्थय हों..बाकि सब मजाक..

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  7. आप आराम करें ….जल्दी लौटे हमें आपका बेसब्री से इंतज़ार रहेगा …..

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  8. रेल चलाते रहें और आराम करें, ब्लागिंग को हम जिलाए रखेंगे। फ़ोटो मस्त खींचा है। कैसे खिंचवा लिया।

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