< गांवदेहात डायरी > तापक्रम चालीस डिग्री छूने लगा है। अब मिट्टी का मटका लेने का समय आ गया है। बाबू सराय में अमूल दूध वाले महेंद्र सिन्ह जी से पूछा—“आसपास कहीं मटकी की दुकान है? टोंटी लगी मटकी वाली?” उन्होंने बताया—“आगे करीब दो सौ मीटर पर एक दुकान है, अच्छी-अच्छी मिट्टी की चीजें मिलतीContinue reading “पूरन वर्मा की झंझरी”
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चकरी तैयार कर गया शारदा परसाद
इस तरह हमारी चकरी, सात साल बाद फिर से तैयार हो गयी। अब दाल दलने के लिये गांव में औरों से मांगनी नहीं पड़ेगी। इसके उलट आस पास के लोग गाहे बगाहे मांगने आते रहेंगे और हमें ध्यान रखना होगा कि कौन ले कर गया।
शारदा परसाद बिंद – चकरी कूटने वाला
गरीब आदमी शारदा। शायद उसे आठ दस हजार का माइक्रो फाइनांस मिले तो वह उपयुक्त औजार खरीद कर अपनी आमदनी बढ़ा सके। पर कोई भी कर्ज किसी काम के लिये लिया जाये, किसी न किसी और मद में खर्च हो ही जाता है।
