बहुत हिम्मत दिखाई संक्रांति स्नान में!

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मेरी बहन साधना रहती है सलोरी, प्रयागराज में। चाचा जी की बिटिया। उसने फोटो दिया है मकर संक्रांति स्नान के बाद का। फोटो में साधना, उसके पति संतोष शुक्ल जी और साधना के नंदोई जी जो पास में ही रहते हैं, हैं। मेरी पत्नीजी ने टिप्पणी की – बहुत हिम्मत दिखाई साधना!

“क्या हिम्मत नहाने के बाद आवाज नहीं निकल रही थी 😃”; साधना ने उत्तर दिया।

बाद में साधना ने फोन पर बताया कि घर में चर्चा हुई – “इतनी पास रह कर भी मकर संक्रांति पर न नहाये तो सही नहीं होगा।” सो पास के घाट पर जाने का प्रोग्राम बनाया। सलोरी के पास तो गाड़ी ले कर जाना निषेध है, इसलिये नारायणी आश्रम के आगे, महाबीरपुरी के घाट पर गये। साधना ने दो डुबकी लगाई। संतोष शुक्ल जी तो ज्यादा वीर थे, उन्होने पांच लगाईंं।

दिन में गंगाजी का पानी ठण्डा बहुत होता है। कल यहां मेरा ड्राइवर भी दोपहर में ईंटवा घाट पर नहाने गया था। उसका अपडेट उसने दिया – का बताई, कड़कड़ाइ गये! (क्या बताऊं, शरीर कड़कड़ा गया)।

मुझे लोग थ्योरी देते हैं कि सूर्योदय के पहले गंगाजी का पानी गरम होता है। जैसे जैसे सूरज ऊपर उठते हैं, जल ठंडा होने लगता है। यह मेरी समझ नहीं आता, पर इस सिद्धांत के फॉलोवर इस #गांवदेहात में सभी हैं।

संतोष और साधना बहुत प्रिय हैं। बहुत मिलनसार। संतोष जी चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। आमने सामने की और सोशल मीडिया पर भी उनका कथ्य सारगर्भित होता है। शिवकुटी, प्रयागराज में तो वे कई बार हमसे मिलने आये। अब यहां गांव में आना नहीं होता उनका। पर उनके आने पर और एक दिन यहां गुजारने पर हम लोगों को आनंद आयेगा।

महाकुम्भ के संदर्भ में साधना का पहला चित्र, पहला विवरण मिला। साधना का भान्जा अच्छे चित्र और वीडियो लेता है। मेला भीड़ को कैसे कैप्चर करना चाहिये, उसकी समझ उसे बहुत सही आती है। अन्यथा लोग अपने मोबाइल उठाये, चकर पकर ताकते इधर उधर के चित्र यूं चरते हैं मानो मेला घास मूली हो और एक बकरी उसे चर रही हो। जब कुछ नहीं सूझता तो मोबाइल के कैमरे को सेल्फी मोड में ले आते हैं। भीड़ को भीड़ से दूर रह कर ही कैप्चर किया जा सकता है।

साधना (और उनके भान्जे) के चित्र, वीडियो और विवरण का इंतजार रहेगा आगे के अमृत स्नान दिवसों पर। और संतोष शुक्ल जी का कथ्य तो बहुत काम का होगा। दूर बैठे महाकुम्भ तो ऐसे ही देखा जा सकता है। वर्चुअल दर्शन!

साधना की एक टिप्पणी ने मुझे बांध लिया – क्या हिम्मत नहाने के बाद आवाज नहीं निकल रही थी 😃

सारे कष्ट, सारी असुविधा के बावजूद लोग वहां जाते हैं, स्नान करते हैं। यही धर्म है!

साधना और संतोष जी की जय हो!

महाकुम्भ #कुम्भमेला25

Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

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