गांवदेहात डायरी आज सुबह सात बजे साइकिल लेकर निकला तो पहली नज़र में ही लगा कि कुछ अलग है। मार्च का महीना है, इसलिए कोहरे की उम्मीद नहीं रहती। पर सामने का दृश्य जैसे धुंध की गहरी चादर में लिपटा था। शांतिधाम से साइकिल गंगा किनारे जाने की बजाय रेल पटरी की ओर मुड़ गई।Continue reading “भारी हवा की सुबह”
