गांवदेहात डायरी सत्तर की उम्र में पैडल चला कर गया पचेवरा तक। जाने में 16 और आने में 9 किलोमीटर। मौसम ठीक था, फिर भी लगा कि पानी की बोतल साथ ले गया होता तो बेहतर होता। मुझे आशा नहीं थी कि कुछ अलग देखने को मिलेगा। वही टूटी सड़क, वही ईंट-भट्ठे पर काम करतेContinue reading “निबड़ियाघाट का पीपे का पुल”
