लसमणा के दुबे बंधु


गांवदेहात डायरी  करीब साल भर बाद लसमणा और बनवारीपुर की संधि से गुजर रहा था। दांई ओर एक भव्य मंदिर बनता दिखा तो मेरी साइकिल अपने आप रुक गई। मंदिर के पास एक आदमी अपने तीन जर्मन शेफर्ड कुत्तों के साथ टहल रहे थे। बनियान और लुंगी में। तीनों कुत्ते बिना लीश के। मैंने सोचा,Continue reading “लसमणा के दुबे बंधु”

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