खाड़ी जंग — पूना से पलायन 

गांवदेहात डायरी 

ट्रेन से पलायन
पूना की कम्पनी और ट्रेन से राज का पलायन

अठारह साल का है राज जाटव। मेरे गांव से पूना गया था आठ महीने पहले। पहली बार गांव से बाहर निकला था—कमाने, अपने चाचा के साथ। पर पिछले महीने की अंतिम तारीख को खाड़ी की जंग शुरू हो गई।

कम्पनी का नाम बताया—पूजा इंजीनियरिंग। चार चक्का कारों के बियरिंग बनाती है। राज के हिसाब से लगभग चार सौ लोग काम करते थे। उसकी पगार बाईस हजार तय हुई थी। नये आदमी के लिये यह पगार ठीक ही मानी जायेगी। काम से भी कोई असंतोष नहीं बताया उसने।

कम्पनी में ज्यादातर लोग बिहार, यूपी और मध्य प्रदेश के थे। महाराष्ट्र के तो मुश्किल से दस–बारह। पांच–सात लोग मिलकर एक कमरे में रहते थे। छोटा सिलिंडर भराकर अपना खाना बनाते थे। जंग शुरू होने से पहले गैस ₹120 किलो मिलती थी।

दिक्कत पांच–छह दिन बाद शुरू हुई। दाम बढ़कर ₹220 हुआ, फिर दो दिन में ₹600। उसके बाद गैस मिलनी ही बंद हो गई। एक दिन सिलिंडर में एक लीटर भर कर दिया, पर अगले दिन पैसा देने पर भी नहीं मिली। कम्पनी की केंटीन दिन में दाल–चावल देती थी, पर उसके सत्तर रुपये पगार से कटते थे। दो दिन तक वे लाई–चना–नमकीन खाकर रहे।

जब खाने का कोई भरोसेमंद इंतजाम नहीं बचा, तो काम छोड़ गांव लौटने का फैसला किया।

जनरल बोगी में भीड़ थी—और भी कम्पनियों से लौटते लोग। कुछ बंबई से भी आ रहे थे। उन्होंने बताया कि वहां भी यही हाल है। होटल तक बंद हो गये हैं।

राज के साथ गांव के पांच लोग लौटे हैं। आसपास के गांवों के भी कई लोग उसी ट्रेन में थे।

एक कम्पनी के सारे कर्मचारी चले जाएं तो कम्पनी अपने आप बंद हो जाती है। राज अपने मैनेजर का नम्बर लेकर आया है। हाल-चाल लेता रहता है। वहां के लोग बताते हैं कि गैस का दाम ₹600 से घटकर ₹420 हुआ है, पर भरोसा किस पर किया जाये?

बाईस हजार की नौकरी राज छोड़ेगा नहीं। मौका मिला तो वापस जायेगा। पर भूखे पेट काम भी कैसे हो?

पूजा इंजीनियरिंग तो एक कम्पनी है। ऐसी न जाने कितनी होंगी। उनमें भी यही हाल रहा होगा। खाड़ी की लड़ाई की विभीषिका का अंदाज गांव में बैठकर नहीं होता। पर राज जैसे लोगों से बात करूं, तो लगता है—यह उथल-पुथल बहुत बड़ी है। दुनिया के लिये बहुत बड़ी।

जंग वहां हो रही है, पर भूख यहां पैदा हो रही है।

— ज्ञानदत्त पाण्डेय
विक्रमपुर, भदोही
23 मार्च 2026

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Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

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