बहुत सी समस्यायें इस सोच के कारण हैं कि हिन्दी ब्लॉगिंग साहित्य का ऑफशूट है। जो व्यक्ति लम्बे समय से साहित्य साधना करते रहे हैं – वे लेखन पर अपना वर्चस्व मानते हैं। दूसरा वर्चस्व मानने वाले पत्रकार लोग हैं। पहले पहल, शायद आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के युग में पत्रकारिता भी साहित्य का ऑफशूटContinue reading “हिन्दी ब्लॉगिंग क्या साहित्य का ऑफशूट है?”
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हिन्दी और अंग्रेजी में ३० गुणा का अंतर
श्रीयुत श्रीलाल शुक्ल जी को पद्मभूषण सम्मान इस अवसर पर “रागदरबारी” के सभी “वादकों” को बधाई! अंग्रेजी में एक ब्लॉग है – Get Rich Slowly. ठीक ठाक ब्लॉग है। फीडबर्नर पर उसके ४६००० पाठक हैं। अभी एक पोस्ट में उसने बताया कि १५ अप्रेल २००६ से ५ मार्च २००७ के बीच उसे ३२५ दिन मेंContinue reading “हिन्दी और अंग्रेजी में ३० गुणा का अंतर”
ज्यादा पढ़ने के खतरे(?)!
अभय तिवारी ने एक ताजा पोस्ट पर ठेला है कि उनकी पत्नी तनु उनसे ज्यादा किताबें पढ़ती हैं। यह मुझे भीषण भयोत्पादक लगा। इतना कि एक पोस्ट बन गयी उससे। “डर लगे तो पोस्ट लिख के सिद्धांतानुसार”। मैं अगर दिन भर की सरकारी झिक-झिक के बाद घर आऊं और शाम की चाय की जगह पत्नीजीContinue reading “ज्यादा पढ़ने के खतरे(?)!”
