दिलीप चौरसिया से मुलाकात 


दिलीप से सवेरे बात होती है। वे महराजगंज में अपनी मेडिकल की दुकान पर हैं। उनका जो छोटा भाई मैडीकल दुकान चलाता है, बीमार हो गया है। अस्पताल में भर्ती है। उसका भी काम देखना होता है।  हाईवे पर ऊपरी मंजिल में उनकी साड़ी की दुकान है — वहां मिलना हुआ उनसे। मैडीकल दुकान सेContinue reading “दिलीप चौरसिया से मुलाकात “

महराजगंज कस्बे का बदलाव – दांत की डाक्टरी


कस्बे के बाजार के बदलाव की कथा अगर कही जाए, तो वह पिछले एक दशक में कहीं ज़्यादा स्पष्ट दिखती है। जब मैं रिटायर होकर यहाँ आया था, तब इक्का‑दुक्का ही प्रशिक्षित फ़िज़ीशियन थे; बाकी झोलाछाप। छोटी‑सी समस्या के लिए भी बनारस जाना पड़ता था, और ख़राब हाईवे व बढ़े ट्रैफ़िक के कारण दो घंटेContinue reading “महराजगंज कस्बे का बदलाव – दांत की डाक्टरी”

गुड़ से लदी 100 बैलगाड़ी का काफिला


टुन्नू पण्डित – शैलेंद्र दुबे, मेरे साले साहब; इलाके का इतिहास खोलना शुरू किये हैं अब। सन 1940-50 में चलता था गोपीगंज के पास तिलंगा से गुड़ से लदा सौ बैलगाड़ियों का काफिला। कलकत्ता जाता था। साढ़े सात सौ किलोमीटर की यात्रा। रोड़ भी क्या रोड थी। गंगा के कंकर बिछाये जाते थे। एक आदमीContinue reading “गुड़ से लदी 100 बैलगाड़ी का काफिला”

Design a site like this with WordPress.com
Get started