एक अच्छे रेलवे डाक्टर के साथ


डाक्टर से वास्ता पड़ता है बीमार होने पर। उस समय आप (पढ़ें मरीज) केवल डाक्टर की दक्षता नहीं तलाशते। उनकी उपलब्धता, उनकी आपके प्रति सहानुभूति, प्रतिबद्धता, स्पष्टवादिता और उनका कॉमन सेंस – इन सब का समग्र तलाशते हैं। पिछले दिनों हमें रेलवे ऑफीसर्स की फेडरेशन में कुछ डाक्टरों को सुनने का अवसर मिला। वे हमारेContinue reading “एक अच्छे रेलवे डाक्टर के साथ”

डेढ़ऊ बनाम ओरल केंसर


शैलेश पाण्डेय ने कहा है कि चट्टी पर उन्हें डेढ़ऊ नामक सज्जन मिले, जिन्हे जब एक व्यक्ति ने खैनी न खाने की सलाह दी तो उनका जवाब था – भैया अबहिएं छोड़ देब .. बस ई गारंटी दई द की हम अमर हो जाइब … डेढ़ऊ की बेफिक्री यूपोरियन संस्कृति का यूनीक सेलिंग प्रोपोजीशन है।Continue reading “डेढ़ऊ बनाम ओरल केंसर”

बीमार की बेतरतीब मानसिक हलचल


1. बुखार में लेटे लेटे पीठ अकड़ गई है। बाहरी जगत से सम्पर्क ही नहीं। पुस्तकें पढ़ने को भी जो लम्बी एकाग्रता चाहिये, नहीं बन पा रही। कमरे की यह लम्बोतरी खिडकी से यदा कदा झांक लेता हूं। शीशम, सागवान और ताड़ के लम्बे लम्बे वृक्ष दिखते हैं। रमबगिया है यह। उसके पार हैं गंगाContinue reading “बीमार की बेतरतीब मानसिक हलचल”

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