ट्विटर पर नष्ट किये समय का विवरण


हिन्दी ब्लॉगिंग शुरू की थी तो स्टैटकाउण्टर से पाला पड़ा था। पोस्टों पर आई टिप्पणियों का निरखन भी होता था। वह काफी समय चला। अब उसका क्रेज़ मिट गया है। पल पल पर उसके आंकड़े देखना जरूरी नहीं लगता। पर शायद किसी मुद्दे के बदलते आंकड़े रुचि जगाते हैं। ट्विटर और फेसबुक के अकाउण्ट मैनेContinue reading “ट्विटर पर नष्ट किये समय का विवरण”

अगली पोस्ट मानसिक हलचल पर


अगली पोस्ट – पण्डित रामलोचन ब्रह्मचारी और हनुमत निकेतन ब्लॉगस्पॉट वाले ब्लॉग “मानसिक हलचल” पर है। कृपया वहां देखने का कष्ट करें!

डिसऑनेस्टतम समय – क्या कर सकते हैं हम?


तरुण जी ने पिछली पोस्ट (डिसऑनेस्टतम समय) पर टिप्पणी मेँ कहा था: Edmund Burke का एक अंग्रेजी quote दूंगा: “The only thing necessary for the triumph of evil is for good people to do nothing.” समाज की इस दशा के लिए कोई और नहीं हम खुद ही जिम्मेदार है खासकर पिछली पीढ़िया। इसे ठीक भीContinue reading “डिसऑनेस्टतम समय – क्या कर सकते हैं हम?”

बनिया (प्रोप्राइटरी) ऑर्गेनाइजेशन


संजीव तिवारी कहते हैं कि उनके बनिया ऑर्गेनाइजेशन में अगर “हम अपनी गर्दन खुद काटकर मालिक के सामने तश्‍तरी में पेश करें तो मालिक कहेगा, यार … थोड़ा तिरछा कटा है, तुम्‍हें गर्दन सीधा काटना नहीं आता क्‍या ???” बनिया (प्रोप्राइटरी) ओर्गेनाइजेशन, बावजूद इसके कि उनके सीईओ ढ़ेरों मैनेजमेण्ट की पुस्तकें फ्लेश करते हैं अपनेContinue reading “बनिया (प्रोप्राइटरी) ऑर्गेनाइजेशन”

लोकोपकार और विकास


रेड टेप निराकरण जरूरी है! लोकोपकार – फिलेंथ्रॉपी एक ग्लैमरस मुद्दा है। जब मैने पिछली पोस्ट लिखी थी, तब इस कोण पर नहीं सोचा था।  लोकोपकार में निहित है कि अभावों के अंतिम छोर पर लोग हों और हम – मध्यमवर्गीय लोग अपने अर्जन का एक हिस्सा – एक या दो प्रतिशत – दान याContinue reading “लोकोपकार और विकास”

मोहम्मद यूसुफ धुनकर


मेरे मोहल्ले के पास जहां खंडहर है और जहां दीवार पर लिखा रहता है “देखो गधा पेशाब कर रहा है”; वहां साल में नौ महीने जानी पहचानी गंघ आती है पेशाब की। बाकी तीन महीने साफ सफाई कर डेरा लगाते हैं रुई धुनकर। नई और पुरानी रुई धुन कर सिलते हैं रजाई। मैं रुई धुनContinue reading “मोहम्मद यूसुफ धुनकर”