गांवदेहात डायरी महेश उपधिया के बब्बा के पास आसपास के गांवों में एक सौ तीस बीघा खेत थे। सवेरे लाठी लेकर निकलते तो सांझ हो जाती थी, सब खेत-बारी देख कर लौटने में। बीच रास्ते उपधिया की पाही पर उनका नौकर खिचड़ी, दही, बाटी-चोखा और दाल जैसा कुछ बना कर रखता था। बब्बा एक-दो घंटाContinue reading “बरियापुर के महेश उपधिया”
