“इनकी रचना को नए ब्लॉग पर डाल दो . दो धेले में नहीं बिकेगी . आज ज्ञानदत्त नाम बिक रहा है”
मुझे दो धेले में पोस्ट नहीं बेचनी। नाम भी नहीं बेचना अपना। और कौन कहता है कि पोस्ट/नाम बेचने बैठें हैं?
भारतीय रेल का पूर्व विभागाध्यक्ष, अब साइकिल से चलता गाँव का निवासी। गंगा किनारे रहते हुए जीवन को नये नज़रिये से देखता हूँ। सत्तर की उम्र में भी सीखने और साझा करने की यात्रा जारी है।
“इनकी रचना को नए ब्लॉग पर डाल दो . दो धेले में नहीं बिकेगी . आज ज्ञानदत्त नाम बिक रहा है”
मुझे दो धेले में पोस्ट नहीं बेचनी। नाम भी नहीं बेचना अपना। और कौन कहता है कि पोस्ट/नाम बेचने बैठें हैं?
सवाल फ़िर से वही है की पहले अंडा या मुर्गी ? यहाँ पोस्ट तो पहले आई नही यहाँ पहले आए ज्ञानजी ! उसके बाद आती है पोस्ट ! और यकीन मानिए ये भी कल की शास्त्री जी वाली पोस्ट की बात है अगर विषयवस्तु नही होगी तो पढेगा कौन ? तो मेरे समझ से लेखक और रचना दोनों ही एक दुसरे के पूरक हैं ! दोनों ही एक दुसरे के बिना अधूरे हैं ! और कोई माने या ना माने , मैं तो यह मानता हूँ की आपकी पोस्ट एक छोटा सा अणु हैं जो अपने अन्दर बहुत बड़ा विस्फोट लिए रहती है !
LikeLike
loktantra me sabka sammanregards
LikeLike
मत बेचिए बस लिखते रहिये
LikeLike
अरे आप कब से ऐसी बाते करने लगे..? देखिए अब तो आप हमे सेनटी कर रहे है.. बोले तो सुबुक सुबुकवादी.. आप कुल्हड़ वाली चाय पी ही लीजिए.. या फिर हमारी कॉफी का निमंत्रण स्वीकार कर लीजिए… बच्चो की बातो का बुरा थोड़े ही मानते है..
LikeLike
इसे माइक्रो पोस्ट बोलेंगे भला?जानने वाले शब्द पढ़ कर जान लेते हैं कि किसने सजाया है. बेचने को इतना कुछ है (बैगन, मूंगफली आदि ) तो पोस्ट और नाम क्योंं बेचा जाय
LikeLike
अब आपसे क्या कहें? हम तो कल भी कन्फुजियाये हुए थे, आज तो इतनी बर्फ है कि स्नोमैन ही बने हुए हैं – सारा दिमाग जम गया है! गरम चाय डाल-डाल कर पिघला रहे हैं और रेलवे स्टेशन की कुल्हड़ की चाय को बुरी तरह मिस कर रहे हैं.
LikeLike
मुझे कोई यह समझा दे कि दो धेले की पोस्ट लिखने वाले का नाम कैसे चल सकता है जबकि हम उन्हे उनके चिट्ठे की वजह से ही जनते हो?
LikeLike
ब्लागिंग सफलता से लोग परेशान होकर कुछ भी कह सकते हैं। जमाये रहिये। अपना काम किये जाइये। इन पर सोचने में टाइम ना गलाइए। वो काम करने के बहुत लोग बैठे हुए हैं.
LikeLike
मुझे दो धेले में पोस्ट नहीं बेचनी। नाम भी नहीं बेचना अपना। और कौन कहता है कि पोस्ट/नाम बेचने बैठें हैं? ” sir, dont get disheartnd, it happns….and yes you have rightly said no one is here to sell name or fame”Regard
LikeLike
Aap hulchul karne baithen hai, kuch bechne bachne jo thore…..mat bechiye lekin banchte rahiye
LikeLike