बनिया (प्रोप्राइटरी) ऑर्गेनाइजेशन



संजीव तिवारी कहते हैं कि उनके बनिया ऑर्गेनाइजेशन में अगर

“हम अपनी गर्दन खुद काटकर मालिक के सामने तश्‍तरी में पेश करें तो मालिक कहेगा, यार … थोड़ा तिरछा कटा है, तुम्‍हें गर्दन सीधा काटना नहीं आता क्‍या ???”

बनिया (प्रोप्राइटरी) ओर्गेनाइजेशन, बावजूद इसके कि उनके सीईओ ढ़ेरों मैनेजमेण्ट की पुस्तकें फ्लेश करते हैं अपने दफ्तर में, चलते पुराने ढर्रे पर ही हैं। एक सरकारी अफसर के रूप में इनसे वास्ता पड़ा है। इनके मालिक व्यवहार कुशल होते हैं। वे डिनर टेबल पर आपको अपनी वाक-पटुता से प्रभावित करते हैं। पर उनके कर्मचारियों के साथ उनका व्यवहार वही दीखता है – ऑटोक्रेटिक। उनका वेलफेयर शायद धर्मादे खर्च में दर्ज होता होगा बही-खाते में।

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