बुढ़िया चपरासी – द्रौपदी और मेरी आजी



बुढिया चपरासी
गलियारे में धूप सेंकती बुढ़िया चपरासी

पिछली पोस्ट में मैने अपने दफ्तर की एक बुढ़िया चपरासी के बारे में लिखा था। आप लोगों ने कहा था कि मैं उससे बात कर देखूं।

मैने अपनी झिझक दूर कर ही ली। कॉरीडोर में उसको रोक उसका नाम पूछा। उसे अपेक्षा नहीं थी कि मैं उससे बात करूंगा। मैं सहज हुआ, वह असहज हो गयी। पर नाम बताया – द्रौपदी।

वह इस दफ्तर में दो साल से है। इससे पहले वह सन 1986 से हाथरस किला स्टेशन पर पानीवाली थी। पानीवाली/पानीवाले का मुख्य काम स्टेशन पर प्याऊ में यात्रियों को पानी पिलाना होता है। इसके अतिरिक्त स्टेशन पर वह अन्य फुटकर कार्य करते हैं। Continue reading “बुढ़िया चपरासी – द्रौपदी और मेरी आजी”

चिठ्ठाजगत का मोबाइल संस्करण



mobile internetचिठ्ठाजगत अब अपने मोबाइल संस्करण में ही दीखता है। मैं अपना वर्डप्रेस का ब्लॉग पन्जीकृत कराना चाहता था, पर विधि स्पष्ट नहीं हो सकी मोबाइल वाली उनकी साइट पर।

फीड एग्रेगेटर का मोबाइल संस्करण एक दूरदर्शी कदम लगता है। ब्लॉगस्पाट और वर्डप्रेस के ब्लॉग मोबाइल संस्करण में उपलब्ध है‍। आगे ब्लॉग लोग मोबाइल पर ही पढ़ें/टिप्पणी करेंगे।

एक अध्ययन [१] के अनुसार अभी ७६% उपभोक्ता इण्टरनेट का प्रयोग मात्र पर्सनल कम्प्यूटर से, १४% पीसी और मोबाइल दोनो से और  केवल १०% सिर्फ मोबाइल से करते है‍। यह दशा सन् २०१५ तक में बदल कर क्रमश: २१%, ३८% और ४१% होने जा रही है।  अर्थात ७८% लोग मोबाइल के प्रयोग से इण्टरनेट देखेंगे। और वर्तमान संख्या से पांच गुना हो जायेंगे इण्टरनेट उपभोक्ता भारत में! अभी ७% लोग इण्टरनेट का प्रयोग कर रहे हैं, पांच साल बाद ३५% हो जायेंगे। 

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