श्री अम्बिका शक्तिपीठ, विराटनगर

03 जून 2023

गीताप्रेस की “शक्तिपीठ दर्शन” में एक पैराग्राफ है – जयपुर के 64किमी उत्तर में महाभारतकालीन विराटनगर के पुराने खण्डहर हैं … यहीं पर विराट ग्राम में शक्तिपीठ है। यहां देवी के दांये पैर की उंगलियां गिरी थीं। यहां की शक्ति “अम्बिका” और भैरव “अमृत” हैं।

यह शक्तिपीठ एक पहाड़ी पर है। सीढ़ियां बनी हैं वहां जाने के लिये पर बहुत ज्यादा नहीं चढ़ना पड़ता। भोर में ही पंचवटी आश्रम के हनुमान मंदिर, जहां प्रेमसागर रुके थे, से निकल कर ढाई किलोमीटर चल कर शक्तिपीठ तक पंहुचे। रास्ता भी सीधा सीधा नहीं है। जंगल सा है। पूछते हुये गये।

श्री अम्बिका शक्तिपीठ की सीढ़ियां

मंदिर के पास कुछ सवेरे पूजा अर्चना करने आई महिलायें भर हैं। उन्होने ही बताया कि पुजारी जी तो आठ बजे तक आते हैं। मंदिर खुला ही रहता है। प्रेमसागर ने खुद ही घण्टी बजाई, ध्यान किया और दर्शन कर बाहर निकले। “भईया, मंदिल छोटा ही है। शक्तिपीठ का बोर्ड जरूर लगा है। माता की आंखें बड़ी सुंदर हैं। लगता है कुछ बोल रही हैं। अकेले वहां अच्छा लगा पर भईया हमको यह समझ नहीं आता कि वह पुजारी कैसे हैं जो ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर देवी देवता की अर्चना नहीं करते? उस पुजारी से ज्यादा अच्छी तो वे औरतें हैं जो सवेरे सवेरे वहां आई थीं।”

मंदिर के पास कुछ सवेरे पूजा अर्चना करने आई महिलायें भर हैं। उन्होने ही बताया कि पुजारी जी तो आठ बजे तक आते हैं। मंदिर खुला ही रहता है।

अरावली की पहाड़ियों से झांकता सवेरे का सूरज – बहुत मोहक दृश्य है और प्रेमसागर ने अपने मोबाइल के साधारण कैमरे से खींचा भी अच्छे से है। चित्र में बिजली के खम्भे और तार जरूर आ गये हैं, पर उनको दरकिनार कर दिया जाये तो सब कुछ वैसा ही है जैसा महाभारतकाल में अज्ञातवास झेलते पाण्डवों ने देखा होगा।

अरावली की पहाड़ियों से झांकता सवेरे का सूरज – बहुत मोहक दृश्य है

“यहां से भईया पंचवटी जा कर अपना सामान उठाऊंगा और चल दूंगा जयपुर की तरफ। थोड़ा लेट निकलना होगा। आज गर्मी भी ज्यादा होगी, ऐसा लगता है। देखें कितना दूर चलना हो पाता है। पुष्कर में शक्तिपीठ दर्शन कर हफ्ता भर आराम करूंगा और फिर निकलना होगा गुजरात। या फिर मध्यप्रदेश के अमरकण्टक। इन जगहों पर पहले जा चुका हूं तो चलना कम पड़ेगा। अमरकण्टक, जबलपुर, उज्जैन और फिर गुजरात। … ” प्रेमसागर आगे की सोचने लगते हैं।

श्री अम्बिका शक्तिपीठ

“भईया एक बात हमको समझ नहीं आता। मध्यप्रदेश में भी जगह देखा। उसको भी विराट नगर कहा जाता है। वहां भी पाण्डवों के रहने के परमान हैं। लोग जनकपुर में भी विराटनगर की बात करते हैं। यहां बहुत ज्यादा बताने वाले नहीं मिले। लोग कहते हैं कि आज आगे वह जगह मिलेगा जहां हनुमान जी भीम के सामने पूंछ रास्ते में रख कर लेटे मिले थे और दोनो में लड़ाई में भीम हो पटक दिये थे। पर भईया विराट नगर के इतने दावेदार हैं कि हम कंफ्यूज हो जाते हैं।” प्रेमसागर ने अपनी शंका व्यक्त की। कायदे से यह शंका उन्हें अपने आध्यात्मिक प्राइम मूवर्स के सामने रखनी जी, जिनकी प्रेरणा से वे यात्रा पर निकले हैं। पर जब मुझसे पूछा तो मैंने चैट जीपीटी को उत्तर देने के लिये पकड़ा।

मैंने उससे पूछा – Where is Virat kingdom of Mahabharat era. I understand many places claim to be the real Virat Nagar. Which is most authentic.

उसने उत्तर में कई स्थान बताये। उसको मैंने दिये उत्तर का हिंदी अनुवाद करने को भी कहा।

सो, विराट नगर के दावेदार बहुत हैं। चित्तौड़गढ़, हनुमानगढ़, बठिंडा, झुंझनू, होशियारपुर, दंतेवाड़ा, चण्डीगढ़, हरियाणा — अनेक स्थल। पर चैटजीपीटी के अनुसार सबसे सम्भावित दावेदारी बैरठ या विराट नगर की है। वह स्थान जहां प्रेमसागर अभी खड़े थे!

चैटजीपीटी का चैट एक मुद्दे को तो फ्लैग करता है। भारत में पुरातत्व को ले कर बहुत काम है जो किया जाना है। इसकी ओर विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और आर्कियॉलॉजिकल सर्वे को काम करने का न तो पर्याप्त मोटीवेशन है और न संसाधन। और तथाकथित हिंदू गौरव की सरकार तो इस दिशा में रत्ती भर भी नहीं कर रही। उसका एक ही काम है – चुनाव दर चुनाव जीतना! :sad:

इस शक्तिपीठ स्थल की दावेदारी का कोई और स्थान मुझे नहीं मिला। कई अन्य स्रोत तो इस शक्तिपीठ को सूची में डालते भी नहीं। मसलन अलका पाण्डे की पुस्तक ‘शक्ति’ में तो राजस्थान का कोई शक्तिपीठ वर्णित ही नहीं है।

चैटजीपीटी का चैट एक मुद्दे को तो फ्लैग करता है। भारत में पुरातत्व को ले कर बहुत काम है जो किया जाना है। इसकी ओर विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और आर्कियॉलॉजिकल सर्वे को काम करने का न तो पर्याप्त मोटीवेशन है और न संसाधन। और तथाकथित हिंदू गौरव की सरकार तो इस दिशा में रत्ती भर भी नहीं कर रही। उसका एक ही काम है – चुनाव दर चुनाव जीतना! :sad:

पर मुझे अच्छा लगा कि इस मनोरम, एकांत और छोटे स्थान की यात्रा प्रेमसागर ने की। मेरे ख्याल से देवी (या देवता) ऐसे निर्जन स्थलों पर ही रहते हैं जहां मानव ने उनका कमर्शियल दोहन नहीं किया है।

शक्तिपीठों में अगर किसी एक जगह मुझे जाने को कहा जाये तो मैं कामाख्या, मंगला गौरी, विशालाक्षी, छिन्नमस्ता … इनके दर्शन की बजाय बैरठ के इस मंदिर में आना पसंद करूंगा। ॐ मात्रे नम:!

श्री अम्बिका शक्तिपीठ से पहाड़ियों का मनोरम दृश्य

हर हर हर हर महादेव। यहां भैरव ‘अमृत’ हैं। भगवान हमें अमृतत्व प्रदान करें!

प्रेमसागर की शक्तिपीठ पदयात्रा
प्रकाशित पोस्टों की सूची और लिंक के लिये पेज – शक्तिपीठ पदयात्रा देखें।
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प्रेमसागर के लिये यात्रा सहयोग करने हेतु उनका यूपीआई एड्रेस – prem12shiv@sbi
दिन – 103
कुल किलोमीटर – 3121
मैहर। प्रयागराज। विंध्याचल। वाराणसी। देवघर। नंदिकेश्वरी शक्तिपीठ। दक्षिणेश्वर-कोलकाता। विभाषा (तामलुक)। सुल्तानगंज। नवगछिया। अमरदीप जी के घर। पूर्णिया। अलीगंज। भगबती। फुलबारी। जलपाईगुड़ी। कोकराझार। जोगीघोपा। गुवाहाटी। भगबती। दूसरा चरण – सहारनपुर से यमुना नगर। बापा। कुरुक्षेत्र। जालंधर। होशियारपुर। चिंतपूर्णी। ज्वाला जी। बज्रेश्वरी देवी, कांगड़ा। तीसरा चरण – वृन्दावन। डीग। बृजनगर। विराट नगर के आगे। श्री अम्बिका शक्तिपीठ। भामोद। यात्रा विराम। मामटोरीखुर्द। चोमू। फुलेरा। साम्भर किनारे। पुष्कर। प्रयाग। लोहगरा। छिवलहा। राम कोल।
शक्तिपीठ पदयात्रा

Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

4 thoughts on “श्री अम्बिका शक्तिपीठ, विराटनगर

  1. विराटनगर के संदर्भ में आपको सटीक जानकारी के लिए सम्पर्क करके आप अपने अपभ्रंश को दूर कर सकते है।9782221111

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