रुद्राभिषेक और रुद्र सूक्त


भला हो कल के प्रदोष काल के रुद्राभिषेक का। मैं रिश्ते के कारण श्रेष्ठ ब्राह्मण था सो मुझे बिना कुछ किये पण्डिज्जी लोगों के साथ पहले भोजन कराया गया। पांच सौ रुपये की दक्षिणा भी मिली (जो मैंने पूरी निष्ठा से अपनी पत्नीजी को दे दी!)

झुरई नदी और सीताकुण्ड


इलाका हराभरा है। मोर बहुत हैं। “भईया एक बात तो मुझे समझ आती है। मोर वहां रहते हैं जहां भगवान का वास हो। यहां मोर की बहुतायत देख कार यकीन होता है कि भगवान राम यहां विद्यमान हैं।

“अगले जनम में राजा बनोगे”


केले जयदेव तिवारी जी ने भेजे। महिला को प्रेमसागर ने दिये। उनकी क्षुधा मिटने पर अगले जनम में राजा बनने का आशीर्वाद पाया। राजा कौन बनेगा? प्रेमसागर या जयदेव मास्टर? पूरी कड़ी में दोनो ही महत्वपूर्ण हैं। शायद दोनो ही राजा बनेंगे।

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