संगम में बद्री लाल के रिक्शे पर


<<< संगम में बद्री लाल के रिक्शे पर >>> पुण्डरीक मिश्र जाने कहां से उसे निकाल लाये। हम शैलेश और पुण्डरीक जी के साथ उनके नमो एप्प के अड्डे से संगम की ओर चल रहे थे। एक-डेढ़ किलोमीटर रही होगी दूरी। बीएसएफ के उस नगा सिपाही ने अपनी नैसर्गिक मुस्कान और दृढ़ता से हमारा स्वागतContinue reading “संगम में बद्री लाल के रिक्शे पर”

यात्रा बनाम यात्राविरक्ति


<<< यात्रा बनाम यात्राविरक्ति >>> आज सवेरे शैलेश पाण्डेय ने प्रयाग से फोन किया। उनका कहना था कि यूं ही उठूं, अपनी गाड़ी में तेल भराऊं और प्रयाग के दारागंज वाले परेड ग्राऊण्ड में पंहुच जाऊं। वहां वे मिल जायेंगे और पूरा मेला साथ रह कर घुमवा देंगे। घूम कर वापस लौटा जा सकता है।Continue reading “यात्रा बनाम यात्राविरक्ति”

मूंगफला के बहाने


<<< मूंगफला के बहाने >>> पड़ाव के नुक्कड़ पर मूंगफली वाला अपना ठेला लगाता है। सवेरे दस बजे हैं तो आ ही गया होगा। देवकली से आता है। आते आते भी समय लगता है। तीन चार तरह की मूंगफली रखता है। एक सिगड़ी पर भूनता भी है और हाथ के हाथ बेचता है। दो तीनContinue reading “मूंगफला के बहाने”

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