
इस दंड परिक्रमा के निमित्त हैं प्रेमसागर। पर धीमी आंच पर बनती तहरी की तरह यह ट्रेवलॉग मेरे मन की हलचल का ज्यादा है।
प्रेमसागर ने मार्च 26 के अंत में मुझसे सम्पर्क किया कि वे दंड परिक्रमा पर निकल रहे हैं। उसके सप्ताह बाद वे फोन पर आये और बोले कि मंडला में नर्मदा के दक्षिण तट से दंड यात्रा उन्होने प्रारम्भ कर दी है। शुरुआत में मुझे लिखने के बारे में और उसकी प्रकृति को ले कर झिझक थी। पर धीरे धीरे मैंने प्रेमसागर को खूंटी मानते हुये, मेरे मन में जो आ रहा था वह लिखना शुरू कर दिया।
नित्य लेखन करीब 400 शब्दों का था। लगभग 2500-3000 शब्दों का एक अध्याय बनाना तय किया। चित्र जो प्रेमसागर ने दिये, उनके आधार पर रेखाचित्र एआई से बनवाये। प्रत्येक अध्याय में लगभग एक चित्र। मेरे मित्र विनोद शुक्ल ने इस तरह लिखने संजोने का सुझाव दिया था, वह मान कर चल रहा हूं।
नीचे अध्याय और उनके ब्लॉग के लिंक दिये गये हैं। जैसे जैसे यात्रा बढ़ेगी, अध्याय बढ़ेंगे, लिंक यहां जमा होते रहेंगे।
1. नर्मदा दंड परिक्रमा : अध्याय 1 – बलिया पेसेंजर से बरगी के ड्रेगन तक
2. नर्मदा दंड परिक्रमा : अध्याय 2 – केवड़ारी से केदारपुर
3. नर्मदा दंड परिक्रमा : अध्याय 3 – केदारपुर से घंसौर
