टुन्नू पण्डित – शैलेंद्र दुबे, मेरे साले साहब; इलाके का इतिहास खोलना शुरू किये हैं अब। सन 1940-50 में चलता था गोपीगंज के पास तिलंगा से गुड़ से लदा सौ बैलगाड़ियों का काफिला। कलकत्ता जाता था। साढ़े सात सौ किलोमीटर की यात्रा। रोड़ भी क्या रोड थी। गंगा के कंकर बिछाये जाते थे। एक आदमीContinue reading “गुड़ से लदी 100 बैलगाड़ी का काफिला”
