एक तुच्छ सी किरिच का क्या भाग्य लिखा था!


अरविंदो आश्रम, पॉण्डिचेरी या रतलाम की स्मृतियों में कई बार ऐसी कथाएँ निकल आती हैं जो मन में यूं घुमड़ती हैं कि छोड़ती ही नहीं। डॉ. हीरालाल माहेश्वरी ऐसे ही साधक थे, जिनकी बातें बार बार हम – मैं और मेरी पत्नीजी – याद करते हैं। आज उनकी याद करते पत्नीजी ने उनकी बताई एकContinue reading “एक तुच्छ सी किरिच का क्या भाग्य लिखा था!”

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