गांवदेहात डायरी बरियापुर के शांतिधाम से निकलता हूं साइकिल ले कर तो दो विकल्प होते हैं—गंगाकिनारे पंडा जी के पास जा कर निरहू की चाय की गुमटी पर चाय पी लूं, या फिर साइकिल को रेल लाइन की ओर मोड़ दूं और उस पार के गांवों को तब तक नापूं जब तक लौटने का वक़्तContinue reading “साइकिल और गौरैया”
