नवजात बच्ची के माता-पिता के सामने एक दिन अचानक एक बड़ी जिम्मेदारी आ खड़ी होती है—बच्ची का नाम क्या रखा जाए? नाम ऐसा हो जो घर में अच्छा लगे, सुनने में मधुर हो, बहुत आम भी न हो और इतना अजीब भी न हो कि बच्ची बड़ी होकर पूछे—“मेरा नाम रखा किसने था?” आजकल माता-पिताContinue reading “इराया का नामकरण”
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विकास मिश्र, अट्ठाईस सिलेंडर और एक संतुष्ट जिंदगी
बीए पास ड्राइवर, जिसने बम्बई-गुजरात देखा और फिर घर के पास की छोटी नौकरी चुन ली छह अगस्त को गैस सिलेंडर बुक किया था। आज अठारह तारीख को आया। इतने दिनों में दो-तीन बार फोन करके पूछताछ की जा सकती थी, लेकिन अब रसोई का काफी काम इंडक्शन पर शिफ्ट हो गया है, इसलिए सिलेंडरContinue reading “विकास मिश्र, अट्ठाईस सिलेंडर और एक संतुष्ट जिंदगी”
मोबाइल नहीं, डिजिटल कल्पवास चाहिए
मोबाइल को जीवन में रस और जीवन के बड़े अर्थ से जोड़ने का उपक्रम सुबह साइकिल लेकर निकलता हूँ। घरपरिसर में ही गोल गोल चक्कर। साइकिल बहुत तेज नहीं चलाता—इतनी ही कि शरीर चलता रहे और मन को पीछे छूट जाने का डर न हो। कान में किसी किताब की summary चलती है, लेकिन 1XContinue reading “मोबाइल नहीं, डिजिटल कल्पवास चाहिए”
