सवेरे का सपना था, इसलिये याद रह गया।


सवेरे का सपना था। इसलिये याद रह गया। वह सड़क किनारे बैठा था। बगल में बरसात का पानी भरा एक छोटा गड्ढा था। कीचड़ था। रात में पानी बरसा होगा। उसे उठने की जल्दी नहीं थी। मैंने नोटबुक निकाली। पता नहीं सपने में नोटबुक कहाँ से आ गई। पूछा – “जमीन पर क्यों बैठे हो?”Continue reading “सवेरे का सपना था, इसलिये याद रह गया।”

भारत: एक लोकतांत्रिक देश ।


“आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ झाँकी हिन्दुस्तान की,इस मिट्टी से तिलक करो, यह धरती है बलिदान की।” यह गीत बचपन से हमें भारत से प्रेम करना सिखाता है। यह हमारे देश की सुंदरता, एकता और लोकतंत्र की बात करता है। जब भी मैं यह गीत सुनती हूँ, मुझे अपने देश पर गर्व होता है। लेकिन कलContinue reading “भारत: एक लोकतांत्रिक देश ।”

मधुमेह के युग में शहद ज़रूरी है क्या?


शहद खरीदने गया था, लौटते समय अपने विश्वासों की भी जाँच साथ ले आया। कल मैं स्थानीय मधुमक्खी पालक विकास पांडे के यहाँ से तीन किलो शहद लेकर लौटा। कीमत थी ₹400 प्रति किलो। चार-पाँच वर्ष पहले जब उनसे शहद लेना शुरू किया था, तब यही शहद ₹305 प्रति किलो मिलता था। कीमत बढ़ी तोContinue reading “मधुमेह के युग में शहद ज़रूरी है क्या?”

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