गांवदेहात डायरी

बरियापुर में गंगा किनारे रहना और एक साधारण साइकिल से घूमना-टहलना। उसके अलावा डेस्कटॉप पर एक-दो घंटा की-बोर्ड पीटना — यही काम है मेरा।
पर फिर भी मन होरमुज़, ईरान, अरब और इजराइल के चक्कर मारता रहता है आजकल।
जेब में पैसे नहीं थे, पर स्मार्टफोन था। मैंने पेट्रोल पम्प की ओर रुख किया।
हीरालाल ने आवाज लगाई—
“का गुरूजी! सइकिलिया में भी तेल भरऊबे का?”
हमउम्र हैं हीरालाल पाठक। चलते-चलते परिचय हुआ था। जन्म का दिन और साल एक ही निकला, बस वहीं से दोस्ती हो गई।
मैंने कहा—
“साइकिल में नहीं, जेब में भराना है। किराने वाले को पहली बोहनी कैश में चाहिए।”
पेट्रोल पम्प पर बिरेंदर से सौ रुपये खुल्ले लिये और यूपीआई से भेज दिये। उसी समय एक कार में भरे जाते पेट्रोल पर नजर चली गई।
मन अचानक रेल के दिनों में पहुंच गया।
बीटीपीएन के रेक याद आये। वे जिनमें पेट्रोल-डीज़ल-नेफ्था जाया करता था।
बाजवा का ऑयल लोडिंग यार्ड याद आया — जहां पैंतालीस साल पहले मेरी प्रोबेशनरी ट्रेनिंग हुई थी।
मथुरा रिफाइनरी और वहां का अतुल भी याद आया — आईओसी में चीफ मार्केटिंग अफसर था। दोस्त ही बन गया था मेरा।
रेल और तेल का पुराना नाता है। कभी टैंकर रेकों से ही देश भर में तेल जाता था। धीरे-धीरे वह यातायात पाइपलाइन पर शिफ्ट होता चला गया।
आजकल होरमुज़ जलडमरूमध्य की खबरें पढ़ता हूँ तो वही पाइप लाइन की सोच फिर लौट आती है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले जहाज उस संकरे रास्ते से गुजरते हैं। अब कुछ तेल पाइपलाइन से भी बाहर जाने लगा है — यूएई और सऊदी ने ऐसे रास्ते बना लिये हैं।
पाइपलाइनें काम की चीज हैं।
शांतिधाम लौटते समय साइकिल के साथ-साथ मन में तेल का यह सारा कारोबार भी चलता रहा।
सोचा — पेट्रोल पम्प पर खुल्ले पैसे लेने न गया होता तो शायद यह सब भी न सोचता।
शायद सही कहते हैं — बुढ़ापे में आदमी सठिया जाता है।
सवेरे तीन बजे नींद खुली। तीखी गंध आ रही थी। रेलवे स्टेशन की ओर से हवा आ रही थी।
नेफ्था की गंध मेरी चिर-परिचित गंध है। कोई रेक जरूर स्टेशन पर खड़ा होगा। और किसी वैगन से थोड़ा-बहुत लीकेज होगा।
मैं रेल सेवा में होता तो कंट्रोल को फोन करता — अगले प्वाइंट पर वैगन एग्जामिनर से रेक चेक कराने को कहता।
पर फिर अपनी रिटायर जिंदगी याद आई।
और धीरे-धीरे फिर सो गया।
अब तुम रेलवे के विभागाध्यक्ष नहीं हो, नीलकंठ।
अब नेफ्था की गंध से परेशान होने की जरूरत नहीं है।
— नीलकंठ चिंतामणि
शांतिधाम, बरियापुर
15 मार्च 2026
@@@@@@@
