शांतिधाम में होरमुज़ – गर्मी उतरनी चाहिये

गांवदेहात डायरी  

बरियापुर के गंगा किनारे पर नदी घूमती हैं। घाट पर खड़े हो कर देखता हूं तो बांये और दांये सिर घुमाने पर वह घुमाव साफ नजर आता है। खाड़ी में युद्ध चल रहा है तो मन में नदी नहीं, होरमुज़ की खाड़ी में ओमान का वह टिप नजर आता है।
नक्शे में जगह का नाम है कुमज़ार। वहां ऊंची पहाड़ी का किनारा है, पर समुद्र तो वैसा ही घूमता होगा जैसे बरियापुर में गंगा। 

सामने से तीन चार डोंगियां इधर उधर गुजर रही हैं। हर एक डोंगी की जगह मुझे विशाल तेल के जहाज लगते हैं। इतनी चपलता से थोड़े ही चल रहे होंगे वे होरमुज़ में? सुना है ईरान ने वहां माइंस बिछा दी हैं। तरह तरह की माइंस – पानी पर तैरती माइंस, समुद्र की तलहटी से लटकी तैरती माइंस, तलहटी पर पड़ी माइंस या चुपके से जहाज के ऊपर चिपकाई माइंस। 

गंगा का यह शांत किनारा मुझे होरमुज़ का युद्धाक्रांत टिप जैसा लगने लगता है। मन भयभीत या अशांत हो तो  रस्सी भी सांप लगती है। गेंहुअन सांप। 

आज गंगा तट पर मन नहीं जमा तो लौट आया। रास्ते में अवधिया जी की पाही है। बाकी जमीन उन्होने अपने दो बेटों को बांट दी है। पांच बीधा यहां अपने नाम रख कर अकेले रहते हैं। अवधियाइन तो आठ साल पहले गुजर गईं। अकेले खेती कराते हैं, गाय पाले हैं। एक ट्रेक्टर भी है और जमीन के साथ एक ट्यूबवेल भी। 

अवधिया जी ने रोक लिया— जल्दी लौटे हैं तो एक ग्लास मट्ठा पीते जाइये। या जो मन हो – दूध या चाय? 

मैंने कहा— मट्ठा ही चलेगा। आपकी ग्लास बहुत बड़ी होती है। आधा ग्लास ही मंगवाइये। 

उनसे बात होने लगी खाड़ी की लड़ाई पर। अवधिया जी को लड़ाई से कोई फर्क नहीं पड़ता, ऐसा उन्होने बताया। बोले— अब नीलकंठ जी, मंहगाई होगी तो आप जैसे को फर्क पड़ेगा जो हर चीज खरीदते हैं। मेरा क्या? गेंहू, धान, दाल, तेल सब खेत का है। गैय्या है तो दूध घी का भी कोई सोचना नहीं। मरें सरये, जितना मन आये, लड़ें। 

उसके बाद दार्शनिक अंदाज में आ गये वे— नीलकंठ जी सारा मामला गर्मी का है। अमेरिका, रूस, इजराइल, ईरान सब को अपनी ताकत की गर्मी है। खाड़ी के मुल्कों को अपने तेल की गर्मी है। लड़ाई तो गर्मी उतारने का तरीका है। आप तो ज्यादा पढ़े लिखे हैं। मेरी तो छोटी बुद्धि में यही आता है। 

मेरे मन की मायूसी की टोन बदल गई थी। शांतिधाम लौटते सोच रहा था— क्या मामला गर्मी उतारने का है? क्या यही मूल कारण है उथलपुथल का? 

कितना समय लगेगा गर्मी उतरने में? 

— नीलकंठ चिंतामणि
शांतिधाम, बरियापुर
14 मार्च 2026

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Published by Gyan Dutt Pandey

Exploring rural India with a curious lens and a calm heart. Once managed Indian Railways operations — now I study the rhythm of a village by the Ganges. Reverse-migrated to Vikrampur (Katka), Bhadohi, Uttar Pradesh. Writing at - gyandutt.com — reflections from a life “Beyond Seventy”. FB / Instagram / X : @gyandutt | FB Page : @gyanfb

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